ये शख़्स जो साइबर हमला रोक हीरो बन गया

  • 14 मई 2017
रैनसमवेयर

शुक्रवार को दुनिया भर के 99 देशों में साइबर हमले से सनसनी फैल गई. इस हमले के कारण कई संस्थानों में कामकाम पूरी तरह से ठप हो गया था.

इस बीच ब्रिटेन के एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने बीबीसी से कहा कि वह संयोग से 'मलिसस रैनसमवेयर' को फैलने से रोकने में कामयाब रहे.

मलिसस रैनसमवेयर एक तरह का साइबर हमला है जिससे शुक्रवार को ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस बुरी तरह से प्रभावित हुई थी. हमले को रोकनेवाला 22 साल का ये शख़्स मलवेयरटेक उपनाम से जाना जाता है.

दुनिया तबाह कर रहा है 'अमरीका में बना' वायरस

'99 देशों में' ज़बरदस्त साइबर हमला, मांगी फ़िरौती

इमेज कॉपीरइट MALWARETECH

उन्होंने एक हफ़्ते की छुट्टी ली थी, लेकिन वैश्विक साइबर हमले के बाद उन्होंने रैनसमवेयर की जांच करने का फ़ैसला किया.

इस जांच के दौरान उन्होंने मलिसस सॉफ्टवेयर में एक 'किल स्विच' पाया जिससे रैनसमवेयर को फैलने से रोकने में मदद मिली. उन्होंने बीबीसी से कहा कि आंशिक रूप से यह संयोगवश हुआ. उन्होंने कहा कि रात में जांच के दौरान उनकी पलकें तक नहीं झपकीं.

हालांकि उनकी तहक़ीक़ात से रैनसमवेयर के कारण जो नुक़सान हुआ था उसकी भारपाई नहीं हो पाई, लेकिन नए कंप्यूटरों में फैलने से यह रुक गया. ऐसे में वह इस मामले में संयोगवश हीरो की तरह सामने आए.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

उन्होंने बीबीसी से इस बात को कबूल भी किया है. उन्होंने बीबीसी से कहा, ''लोगों का ध्यान ज़्यादा खींचा. मेरे बॉस ने मुझे इस वजह से एक और साप्ताहिक अवकाश दिया है.''

रिसर्चर ने आख़िर खोजा क्या?

रिसर्चर ने पहले नोटिस किया कि मलवेयर एक ख़ास वेब ऐड्रेस से लगातार कनेक्ट होने की कोशिश कर रहा है जिससे नए कंप्यूटर समस्याग्रस्त हो जाते. लेकिन वेब ऐड्रेस के जुड़ने की कोशिश के दौरान- अक्षरों में घालमेल था और ये रजिस्टर्ड नहीं थे. मलवेयर टेक ने इसे रजिस्टर करने का फ़ैसला किया और उसने 10.69 डॉलर में ख़रीद लिया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इसे ख़रीदने के बाद उन्होंने देखा कि और किन कंप्यूटरों तक उसकी पहुंच बन रही है. इसी मलवेयर टेक को आइडिया मिला कि रैनसमवेयर कैसे फैल रहा था. इस मामले में उन्हें अप्रत्याशित रूप से रैनसमवेयर को रोकने में सफलता मिली.

इस तरह के कोड को एक 'किल स्विच' के रूप में जाना जाता है. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है तो कुछ हमलावर सॉफ्टवेयर तक फैलने से रोकने में इसका इस्तेमाल करते हैं. मलवेयर टेक ने अपनी खोज का परीक्षण किया और जब रैनसमवेयर को रोकने में सफल रहे तो उन्हें प्रशंसा भी मिली.

उन्होंने अपने ब्लॉ़ग में लिखा है, ''अब आप शायद एक वयस्क पुरुष को ख़ुशी से उछलते हुए नहीं देख सकते, लेकिन मेरे साथ ऐसा ही था.'' मलवेयर टेक का मानना है कि इस कोड को रैनसमवेयर की जांच कर रहे रिसर्चरों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन रिमोट से लैस नहीं होने के कारण यह उल्टा साबित हुआ.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

क्या रैनसमवेयर हार गया?

जब वेब ऐड्रेस का रजिस्ट्रेशन हुआ तो उसने रैनसमवेयर को डिवास-टू-डिवाइस फैलने से रोक दिया. हालांकि जो कंप्यूटर चपेट में आ चुके थे उनके नुक़सान की भरपाई नहीं हो सकी. सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि नए तरह के मलवेयर पर 'किल स्विच' का असर नहीं होगा.

सिक्योरिटी रिसर्चर ट्रॉय हंट ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा है, ''ऐसे मलवेयर फिर से नहीं फैलने चाहिए. हालांकि ये निश्चित तौर पर नक़ल है.''

मलवेयरटेक ने चेतावनी दी है, ''हमलोगों ने इसे रोक दिया, लेकिन दूसरा फिर से आएगा और हम इसे रोक नहीं पाएंगे. इसमें काफ़ी पैसा है और इसे रोकने की कोई वजह नहीं है क्योंकि इसके कोड बदलने की पर्याप्त कोशिश नहीं की गई है.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे