कितनी पर्फ़ेक्ट है बोलने वाली ये सेक्स डॉल

सेक्स डॉल

'हार्मनी' एक नई तरह की सेक्स डॉल है, जो चल सकती है और बातें भी कर सकती है.

उसका सिर, पलकें और होंठ पूरी तरह से तैयार नहीं हैं और उसकी बातचीत भी सीमित है. लेकिन वो नई रोबोटिक्स क्रांति का हिस्सा है जिसके बिल्कुल इंसानों जैसे शरीर में कृत्रिम समझ भी है.

कुछ लोगों का मानना है कि ये इंसानों के रोबोट के साथ बातचीत करने की दिशा में क्रांतिकारी क़दम है जबकि कुछ लोगों को मानना है कि ये रोबोट विकास का सबसे ख़राब प्रदर्शन है.

ऐसा कहा जाता है कि जितना हम मानव रूप के प्रतिरूप के क़रीब जाते हैं उतना ही हम अपनी रचना से डरते हैं, ये बात कैलिफ़ोर्निया के सैन मार्कोस की एक फ़ैक्ट्री में सच होती लगती है.

इसके रिसेप्शन पर बिज़नेस सूट पहने दो इंसानों जैसे पुतले आने वालों के स्वागत में तैनात रहते हैं. इसकी लॉबी की दीवारें ख़ूबसूरत लड़कियों के पोस्टरों से भरी हैं, इन्हें बहुत ग़ौर से देखने पर ही जाना जा सकता है कि ये डॉल हैं.

रियल डॉल बनाने वाली एबिस क्रिएशन के प्रमुख मैट मैकमुलेन 'आर्ट एंड स्कल्पचर' की पृष्ठभूमि से आते हैं.

मेरे इंटरव्यू के दौरान अपनी नई डॉल 'हार्मनी' की विग ठीक करते हुए उन्हें देखकर लगता है कि उसके रूपरंग को वो बहुत पसंद करते हैं. उनका कहना है कि हार्मनी सेक्स डॉल की दुनिया में अगला क़दम है.

क्या आप किसी रोबोट के साथ सेक्स करेंगे?

इस रोबोट से बदतमीज़ी की तो ये नाराज़ होगी

Image caption रिसेप्शन पर मौजूद डॉल

सेक्स डॉल का व्यक्तित्व

बातचीत करने वाली इस डॉल के बारे में मैकमलन का कहना है, "कई लोग इस रियल डॉल को इसलिए ख़रीद सकते हैं क्योंकि ये महसूस कराती है कि ये सेक्स खिलौने से ज़्यादा यौन सक्षम है."

वो कहते हैं, "इसकी उनके घर में मौजूदगी एक व्यक्तित्व की कल्पना कराती है. एआई (ऐप) लोगों को अपनी डॉल का व्यक्तित्व बनाने का उपकरण देगा."

ये एक ऐप के ज़रिए किया जाता है जिसे डॉल के साथ या स्वतंत्र रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. ये उसी तरह का ऐप होता है जो स्मार्ट फ़ोन में वर्चुअल व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

उपभोक्ता के पास डॉल के लिए कई व्यक्तित्व के विकल्प होते हैं जैसे मूडी, ग़ुस्सैल और प्यार के विकल्प. मैकमलन ने हार्मनी के लिए ईर्ष्या का विकल्प चुना और वो कहती हैं, "उस लड़की को फ़ेसबुस से हटाओ."

मैकमुलेन का दावा है कि ये उपभोक्ता से सीखती है, लेकिन जब मैंने 'हार्मनी' से पूछा कि ईर्ष्या करने में कैसा महसूस होता है तो वो माफ़ी मांगते हुए कहती है कि 'उसे अपने कौशल में सुधार की ज़रूरत है.'

जिस ऐप के ज़रिए हार्मनी को ये सब सिखाया जाता है वो ख़रीदने के लिए उपलब्ध है. हालांकि इस ऐप को सिर्फ़ एबिस की ही एक वेबसाइट रियलबॉटिक्स से ख़रीदा जा सकता है. इसकी सुनिश्चित सामग्री की वजह से ये ना तो गूगल और ना ही ऐपल के स्टोर में उपलब्ध है.

क्या रोबोट से सेक्स करना बेवफाई है?

'गिफ़्ट में सेक्स डॉल लेना गंदी बात'

'सामान्य' ग्राहक

ये डॉल इस साल के आख़िर तक ख़रीदने के लिए उपलब्ध होगी और इसके दो वर्जन होंगे.

एक वर्जन होगा जिसमें ये चेहरों को पहचान सकेगी जिसकी क़ीमत 10 हज़ार डॉलर होगी और दूसरा सस्ता वर्जन 5 हज़ार डॉलर का होगा जिसमें ये चेहरे नहीं पहचान सकेगी.

फ़िलहाल ये फ़ैक्ट्री पूरी दुनिया के ग्रहकों के लिए डॉल बनाती है जिनमें ज़्यादातर पुरूष होते हैं. हालांकि इसका दावा है कि इसके पास कुछ महिला ग्राहक भी हैं.

सभी डॉल सुंदरता की परिभाषा के अनुरूप हैं. इनका फ़िगर बार्बी की तरह है.

मैकमुलेन कहते हैं कि डॉल की डिज़ाइन ग्राहक के कहे अनुसार होती है.

वो कहते हैं, "हम व्यापार कर रहे हैं और हमारे ज़्यादातर ग्राहकों कि विशेष मांगें होती हैं. दुर्भाग्य की बात ये है कि इनमें से शायद ही कोई आदर्श रूप में होती हैं."

मैकमुलेन बताते हैं कि उनके ग्राहक 'पूरी तरह से सामान्य' हैं. उनका दावा है कि कई तो अपनी पत्नियों के साथ डॉल ख़रीदने आते हैं, लेकिन बाद में वो स्वीकार करते हैं कि ज़्यादातर सेक्स डॉल इसलिए ख़रीदने आते हैं क्योंकि वो साधारण महिलाओं के साथ संबंध नहीं बना पाते.

महिला हस्तमैथुन: मिथक और सच्चाई

कहीं आप वर्चुअल सेक्स के आदी तो नहीं!

ग्राहकों की उम्मीदें

वो कहते हैं, "कई लोग अलग-थलग और अकेले होते हैं लेकिन वो संभवत: पहले से ही ऐसे होते हैं. जो लोग अकेले होते हैं और किसी से रिश्ता नहीं बना पाते ये उनके लिए एक विकल्प है. लेकिन मैंने कभी भी सेक्स डॉल या रोबोट को एक रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं देखा."

मैकमुलेन ख़ुद भी अपने लिए सेक्स डॉल नहीं रखते उनका कहना है कि उनकी 'पत्नी और बच्चे' हैं.

एरिज़ोना के मार्क यंग के पास माय लिन नाम की सेक्स डॉल है. उन्होंने हाल ही में हार्मनी एआई ऐप के बारे में जानकारी ली, लेकिन वो दो सेक्स डॉल को एक करने की योजना नहीं बना रहे.

मार्क कहते हैं, "मैं सोचता हूं कि ऐप उसको नई ज़िंदगी तो दे सकता है, लेकिन ऐप में डॉल का अपना एक व्यक्तित्व है जो कि माय लिन की उस छवि से अलग है जो मेरे दिमाग़ में है. तो ये दो तरह के रिश्ते निभाने जैसा होगा."

ऐप में वो इसमें ख़ुशी, लगाव और बातूनी होने के प्रोग्राम चाहते हैं. वो कहते हैं, "एआई पूरी तरह से अलग है और ये मुझे भविष्य को लेकर काफी उत्साहित करता है."

समलैंगिक होने को ग़लत क्यों माना जाता है

वो बातें जो सेक्स एजुकेशन के बारे में सिखाई जानी चाहिए

रोबोट को लेकर चिंता

लेसेस्टर के डी मोन्टफोर्ट यूनिवर्सिटी में रोबोट नीतिशास्त्र की प्रोफ़ेसर कैथलीन रिचर्डसन इस तहर की मशीनों के समाज पर असर को लेकर काफ़ी काम कर रही हैं और इस तरह के रोबोट को लेकर बेहद चिंतित हैं.

वो कहती हैं, "इस दुनिया में सात अरब लोग हैं और हम लोगों के बीच रिश्ते बनाने के संकट से जूझ रहे हैं और कंपनियां यह कह रही हैं कि वस्तुएं एक इंसान की जगह ले सकती हैं. हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो वैश्यावृत्ति के ज़रिए सेक्स को एक वस्तु की तरह बनाती है. इंसानों को एक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और सेक्स डॉल इसी का विस्तार है."

कैथलीन ने कुछ साल पहले सेक्स रोबोट पर प्रतिबंध लगाने के लिए अभियान चलाया था और तभी ये तय कर लिया था कि सेक्स डॉल समस्या नहीं हैं, बल्कि मुद्दा सेक्स के प्रति व्यवहार और एक-दूसरे के बारे में है.

वो नई एआई सक्षम सेक्स डॉल को ख़ारिज करती हैं.

...तो नपुंसकता की असली वजह कुछ और है!

सेक्स की लत से लड़ते शख़्स की कहानी

तकनीकी बदलाव से घबराहट

वो कहती हैं, "किसी इंसान जैसी डॉल में कृत्रिम समझ डालने का विचार ग़लत है. इससे कहीं ज़्यादा कृत्रिम समझ मेरी वॉशिंग मशीन में है. सिर्फ़ इसलिए कि इसके पास चेहरा और शरीर है इसका मतलब ये नहीं है कि ये इंसान है."

गोल्डस्मिथ यूनिवर्सिटी की डॉक्टर केट स्मिथ का अलग नज़रिया है.

वो कहती हैं " वर्तमान में सेक्स रोबोट का लक्ष्य निश्चित तौर पर पुरुष हैं, लेकिन सेक्स टॉय उद्योग विकसित हो रहा है और कई स्टार्टअप महिलाओं के लिए सेक्स टॉय पर काम कर रही हैं."

केट का कहना है, "जब भी कोई बड़ा तकनीकी बदलाव होता है तो हमेशा हलचल बढ़ जाती है, लोग घबरा रहे हैं कि ये इंसानों पर कैसे असर करेगा, लेकिन तकनीक अकसर लोगों को साथ ले आती है."

हस्तमैथुन करने पर 100 डॉलर जुर्माना!

क्या बच्चों को पॉर्न की शिक्षा दी जानी चाहिए?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे