आपके व्हॉट्सएप डेटा का इस तरह इस्तेमाल कर रहा है फ़ेसबुक

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पिछले साल अगस्त में व्हॉट्सएप ने अपने यूज़र्स के फ़ोन नंबर फ़ेसबुक से साझा करने का ऐलान करके सबको चौंका दिया था.

2014 में फ़ेसबुक ने व्हॉट्सएप को ख़रीद लिया था. उसके बाद ये पहली बार है कि व्हॉट्सएप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया है.

इसका साफ़ मतलब था कि विज्ञापन बढ़ेंगे और प्राइवेसी घटेगी.

तकनीकी मामलों की कंसल्टेंसी कंपनी ओवम की पामेला क्लार्क डिक्सन ने बीबीसी से कहा कि व्हॉट्सएप के कई यूज़र्स इससे ठगा हुआ महसूस कर रहे थे.

इस गुरुवार को यूरोपीय आयोग ने इस बात पर सहमति जताते हुए फ़ेसबुक पर व्हॉट्सएप को ख़रीदते वक्त ग़लत जानकारी देने के मामले में एक करोड़ 20 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया है.

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ये पहली बार है कि यूरोपीय आयोग ने मर्जर के दौरान 'झूठ बोलने' के कारण किसी कंपनी पर कार्रवाई की है.

'यूरोपियन कमिश्नर फॉर कंपटीशन' मार्गरेटे वेस्टेयर ने कहा कि जुर्माना सही है और इससे सही संदेश भी जाएगा.

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फ़ेसबुक ने वादा किया था कि वह अपने और व्हॉट्सएप के खातों को नहीं जोड़ेगा, लेकिन वह इस पर क़ायम नहीं रहा.

हालांकि फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी ने अच्छी भावना से काम किया और हर बार सही जानकारी देने की कोशिश की.

तो फिर फ़ेसबुक ने क्यों उठाया ये ख़तरा?

फ़ेसबुक को आपका नंबर क्यों चाहिए?

एक जवाब ये हो सकता है कि फ़ेसबुक आपको उन लोगों को फ़्रेंड बनाने की सलाह दे सके जिनके साथ आप फ़ोन पर तो जुड़े हैं लेकिन सोशल नेटवर्क के ज़रिए नहीं.

अगर अभी तक ऐसा नहीं हुआ है तो चौंकिएगा नहीं, अगर कभी फ़ेसबुक पर दोस्ती के सुझावों में आपको वो पड़ोसी दिखे, जिसका कभी काम पड़ने पर आपने नंबर लिया था.

या वो प्लंबर दिखे, जिसने व्हॉट्सएप पर घर आने का समय पूछा हो.

हां, उन्हें फ़ेसबुक पर फ़्रेंड बनाना है या नहीं, यह फ़ैसला आप ही करेंगे.

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विज्ञापनों का खेल

यह तो सभी देखते हैं कि फ़ेसबुक पर दिखने वाले विज्ञापन हर यूज़र के मुताबिक पर्सनलाइज़ किए होते हैं.

गूगल पर आप जो सर्च करेंगे, फ़ेसबुक उससे जुड़े विज्ञापन आपको दिखाना शुरू कर देगा.

और इसका फ़ायदा ब्रांड उठाते हैं. वे अलग-अलग उम्र, रुचियों, शहरों और कई अन्य जानकारियों के मुताबिक कैटेगरी में बंटे यूजर्स के लिए विज्ञापन भेजते हैं.

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लेकिन इसके लिए व्हॉट्सएप से आपकी जो जानकारी फ़ेसबुक को मिल रही है, उसका भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, व्हॉट्सएप के ज़रिए चुनिंदा विज्ञापन भेजने के नए सिस्टम पर भी काम चल रहा है.

रॉयटर्स के हाथ मार्च महीने में कंपनी का एक अंदरूनी दस्तावेज़ लग गया था.

एक शोध के मुताबिक, कंपनियां व्हॉट्सएप के ज़रिए संभावित उपभोक्ताओं को टारगेट करते हुए सीधे विज्ञापन भेज सकती हैं.

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दरअसल कोशिश इस बात की है कि व्हॉट्सएप पर सीधे यूज़र्स को मैसेज भेजने के लिए कंपनियों से पैसा लिया जाए.

जब फ़ेसबुक ने व्हॉट्सएप को खरीदा था तब कहा था, "हम विज्ञापन और उत्पादों को लेकर अनुभवों को बेहतर बनाना चाहते हैं."

एक ब्लॉग में कंपनी ने कहा था कि फ़ेसबुक सिस्टम से आपके नंबर को जोड़कर हम आपको आपके अनुरूप विज्ञापन दिखाना चाहते हैं.

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आपका आख़िरी लॉग-इन जानने की कोशिश

व्हॉट्सएप फ़ेसबुक को ये भी बताता है कि आप कब आख़िरी बार व्हॉट्सएप पर गए थे.

यूं तो इसका जानकारी चुराने से कोई सीधा संबंध नहीं है लेकिन इसके ज़रिए ये जानने आसान हो जाता है कि आप किस तरह से व्हॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और आप विज्ञापन देने वाली कंपनी के लिए एक दिलचस्प टारगेट होंगे या नहीं.

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हक़ीकत ये है कि लगातार व्हॉट्सएप इस्तेमाल करने वालों के बारे में फ़ेसबुक ये भी जान सकता है कि कब वो सोने जाते हैं.

फ़ेसबुक का कहना है कि वो व्हॉट्सएप मैसेज का डेटा नहीं साझा करता क्योंकि ये एनक्रिप्टेड होता है.

कंपनी का ब्लॉग कहता है, "आपके एनक्रिप्टेड मैसेज निजी रहते हैं और कोई भी उन्हें नहीं पढ़ सकता है. चाहे व्हॉट्सएप हो या फ़ेसबुक या फिर कोई और."

क्या इससे बचा जा सकता है?

जब फ़ेसबुक ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किए थे तो अपने यूज़र्स से नई शर्तें मानने को कहा था.

ये एक ऑटोमैटिक मैसेज के तहत किया गया था. इसके 'रीड मोर' ऑप्शन में जाकर आप 'शेयरिंग अकाउंट इनफ़ॉर्मेशन को डिएक्टिवेट' भी कर सकते थे.

हालांकि यूज़र्स को अपना मन बदलने के लिए एक महीने का समय दिया गया था. लेकिन आपने इसे मंज़ूरी दे दी थी तो फ़िलहाल कोई रास्ता नहीं है.

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