पीठ में है तकलीफ़ तो ये नुस्ख़े आज़माएं

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दुनिया भर में हर साल एक करोड़ कामकाजी दिनों का नुकसान होता है और इसकी वजह है 25 से 64 साल के लोगों की पीठ में होने वाली तकलीफ़.

हममें से 80 फ़ीसदी लोग अपने जीवन में कभी ना कभी पीठ की तकलीफ़ की समस्या का सामना करते हैं.

पीठ की तकलीफ़ से हर साल ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को क़रीब 12 अरब पाउंड सालाना का नुकसान होता है.

बीबीसी की ख़ास वन डॉक्टर इन द हाउस सिरीज़ में मैंने 42 साल के मार्क की मदद की. रिटेल में काम करने वाले मार्क बीते 20 सालों से पीठ की तकलीफ़ से परेशान हैं.

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पीठ की तकलीफ़ कुछ दिनों की समस्या होती है और कुछ सप्ताह में अमूमन दूर हो जाती है, लेकिन मार्क का मामला दूसरा है.

उनकी समस्या सालों से चली आ रही है. इसके चलते उन्हें काम छोड़ना पड़ा और इस वजह से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है, उन्हें लगातार अस्पताल के चक्कर भी काटने पड़े.

तकलीफ़ की वजह जानिए

ऐसे में पीठ की तकलीफ़ की समस्या का निदान उसी तरह होना चाहिए, उसकी मूल वजह उसी तरह से तलाशा जाना चाहिए जिस तरह से आप कैंसर या अन्य दूसरी गंभीर बीमारी की वजह तलाशते हैं.

हालांकि पीठ की तकलीफ़ के अधिकांश मामलों में कोई ख़ास वजह नहीं होती. मार्क के साथ बिताए गए समय के आधार पर मैं कह सकता हूं कि- पीठ की तकलीफ़ की वजह यांत्रिक, मनोवैज्ञाननिक और जैव रासायनिक हो सकती है.

मैंने सबसे पहले मार्क के पैरों को देखा तो पाया कि वे सुडौल नहीं थे- थोड़े ठेढ़े-मेढ़े थे. मुझे लगा कि उनकी पीठ की तकलीफ़ की ये वजह हो सकती है, इसलिए मैं उन्हें मूवमेंट स्पेशलिस्ट के पास ले गया.

फिर मैंने मार्क के पूरे इतिहास को देखा. मार्क जब पांच साल के थे, उनके दाएं घुटने में चोट लगी और उनका पांव टूट गया था. इन दो वजहों से भी उनकी पीठ में तकलीफ़ हो सकती है.

मूवमेंट स्पेशलिस्ट ने बताया कि उनकी मांसपेशियां उस तरह से काम नहीं कर रही हैं जिस तरह से करनी चाहिए. उनके बाएं पैर पर ज़्यादा ज़ोर पड़ रहा था. इसके बाद मूवमेंट स्पेशलिस्ट ने मार्क को कई मूवमेंट बताए और उन्हें सप्ताह में कई बार करने को कहा.

मार्क के मुताबिक, ''पहले के विशेषज्ञों ने इस बात को नोटिस नहीं किया था, लेकिन डॉक्टर चटर्जी ने मेरी पीठ की तकलीफ़ को अलग नज़रिए से देखा और उस संभावित वजह तक पहुंच पाए जो मेरी तकलीफ़ की असली वजहों में शामिल थी.''

इतना ही नहीं, मार्क इस तकलीफ़ की वजह से काफ़ी तनाव में रहने लगे थे. वित्तीय संकट, रोज़गार की चिंता और अनिद्रा की वजह से उन पर तनाव बढ़ रहा था. तनाव, हमारे दिमाग़ को प्रभावित करने लगता है.

मार्क के तनाव को कम करने के लिए मैंने उसे संगीत सुनने को कहा, मेडिटेशन करने को कहा और मार्शल आर्ट 'ताई ची' भी शुरू करने को कहा. ताई ची एक तरह से मूविंग मेडिटेशन जैसा अभ्यास है जिसके ज़रिए सांसों को नियंत्रित किया जाता है.

ये नुस्ख़े आज़माएं

इसके अलावा मार्क के शरीर में विटामिन डी का स्तर काफ़ी कम था, यह शरीर की हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण पोषक होता है और मूलत: हमें सूर्य की रोशनी से मिलता है, मछली और अंडे खाने से भी ये हासिल होता है.

गहरे रंग वाली त्वचा वाले लोगों में विटामिन डी कम होने का ख़तरा हो सकता है. मैंने मार्क के विटामिन डी के स्तर को संतुलित किया.

पीठ की तकलीफ़ के लिए अभ्यास, मनोवैज्ञानिक थेरेपी के साथ चिकित्सकीय उपाय भी किए गए. 15 सालों के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि अलग-अलग मरीज़ों के लिए अलग-अलग उपाय काम में आते हैं.

मार्क के साथ किए प्रयोगों का असर हुआ कि दो महीने के बाद वे सामान्य ज़िंदगी की तरफ़ लौटने लगे. बाइक चलाने लगे.

पीठ की तकलीफ़ की समस्या के हल के लिए आपको उसकी मूल वजह को जानना चाहिए. मैं दस सालों तक इस समस्या से पीड़ित रहा, लेकिन मूवमेंट स्पेशलिस्ट की वजह से मैं समस्या से मुक्त हो सका.

पीठ की तकलीफ़ की समस्या को दूर करने के लिए कुछ उपाय निम्नलिखित हैं-

1.अगर आप कामकाजी हैं तो डेस्क से नियमित समय अंतराल पर उठते रहें. हो सके तो इसके लिए अलार्म लगा लें. स्टैंडिंग डेस्क पर काम करें. अलग-अलग तरह की कुर्सियों का इस्तेमाल करें.

2.योग और मेडिटेशन करें, ये संभव नहीं हो तो वॉक ही किया करें.

3.अगर आप किसी एक्टिविटी को पसंद करते हैं तो उसे लंबे समय तक करें.

4.कोशिश करें कि एक्टिव रहें और इसके लिए नियमित तौर पर वॉक करें.

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