द. अमरीका के चमगादड़ फैला रहे पूरी दुनिया में इबोला

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जानवरों से फैलने वाले संक्रमण पर शोध करने वाली एक टीम ने दक्षिण अमरीका को दुनिया में वायरसों की खान बताया है.

न्यूयॉर्क में इकोहेल्थ एलायंस ने स्तनपायी जानवरों में रहने वाले वायरस और उनके इंसानों को संक्रमित करने की प्रक्रिया की जांच की है.

इंसानों में कहां से आया इबोला?

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इस जांच में सामने आया है कि चमगादड़ों में अन्य स्तनधारियों के मुक़ाबले ज़्यादा वायरस होते हैं.

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शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि इस शोध से भविष्य में एचआईवी, इबोला और फ़्लू जैसे वायरसों को फैलने से रोका जा सकता है.

सबसे ज़्यादा चिंताजनक संक्रमणों में से कुछ जानवरों से इंसानों में आए हैं. मसलन, एचआईवी चिंपाज़ी से होते हुए इंसानों में आया.

वहीं, इबोला के चमगादड़ों से इंसानों में आने के बात मानी जाती है.

लेकिन शोधकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती इस बात का पता लगाना था कि ऐसी अगली बीमारी कहां पैदा हो सकती है.

इस प्रक्रिया में शोधकर्ताओं ने 754 तरह के स्तनपायी जीवों को संक्रमित करने वाले 586 वायरसों को देखा. इसमें 188 ज़ूनोटिक संक्रमण शामिल थे जो जानवरों और इंसानों दोनों को प्रभावित करते हैं.

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नेचर जर्नल में छपे अध्ययन के मुताबिक, चमगादड़ों की हर प्रजाति में 17 ज़ूनोटिक वायरस होते हैं और हर प्राइमेट एवं रोडेंट में 10 ज़ूनोटिक वायरस होते हैं.

इसके बाद इस टीम ने इन प्रजातियों और उनके प्रकारों का अध्ययन करते हुए दुनिया का डेंजर मैप तैयार किया जिससे पता चलता है कि ये जीव अपने साथ वायरसों को लेकर कहां जाते हैं.

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वायरसों के मामले में चमगादड़ दुनियाभर में वायरस फैला सकते हैं लेकिन इनका केंद्र दक्षिणी अमरीका है.

वहीं, प्राइमेट्स से ख़तरा उष्णकटिबंधीय इलाकों में है.

रोडेंट्स की बात करें तो इनसे ख़तरा पूरी दुनिया में फैल सकता है लेकिन इनका केंद्र दक्षिण अमरीका ही है.

बीबीसी से बात करते हुए शोधकर्ता डॉ. केविन ओलिवल ने कहा, "दुनिया के अलग अलग हिस्सों के अलग अलग स्तनपायी जानवरों के लिए ख़तरे के अलग अलग कारण हो सकते हैं."

ओलिवल कहती हैं, "लेकिन मैं चमगादड़ों से नहीं डरती. ये उनकी गलती नहीं है."

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शोधकर्ता आशा करते हैं कि उनके डैंजर मैप से दुनिया भविष्य में आने वाले संक्रमण से निपटने के लिए तैयार होगी.

वे कहती हैं, "इससे बस एक चीज़ सामने आती है कि ये बीमारियां पर्यावरण पर हमारे प्रभाव के चलते सामने आ रही हैं. हमारा जवाब ये है कि हमें वन्यजीवों से अपना संपर्क कम करना चाहिए जिसमें उनके शिकार और वन्यजीवन का विनाश भी शामिल है."

कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी से जुड़े जेम्स लॉयड स्मिथ कहते हैं, "हालांकि, सभी महामारियां पशुओं से आती हैं लेकिन ज़्यादातर पशुजन्य रोगों से महामारियां नहीं फैलतीं. इन संभावनाओं से शोध और वायरस की निगरानी में प्राथमिकता तय की जा सकती है लेकिन नीतिगत फैसले नहीं लिए जा सकते.

शोधकर्ता अब चिड़ियों को अपने शोध का हिस्सा बनाएंगे जो एवियन फ़्लू जैसी बीमारियों को लेकर चलती हैं.

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