बच्चों का इंटरनेट सीमित करना हल नहीं

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बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को सीमित कर देने भर से उन्हें सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से नहीं बचाया जा सकता है. ब्रिटेन के एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक नए शोध में शोधकर्ताओं ने यह पाया है.

विकसित देशों में इंटरनेट के इस्तेमाल की दर के मामले में ब्रिटेन के किशोर काफी आगे हैं. इसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है.

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इस नए अध्ययन में कहा गया है कि इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने से उलटे बच्चों में डिजिटल स्किल और भावनात्मक रूप से संवेदनशील होने का अभाव हो जाता है.

ऑनलाइन समस्या से निपटने की क्षमता का अभाव

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एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के मानसिक स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर एमिली फ्रायथ ने बताया कि बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने से ऑनलाइन आने वाली मुश्किलों से तो उन्हें निजात मिलती है, लेकिन इससे उनके अंदर समस्याओं से निपटने की क्षमता कम हो जाती है.

उन्होंने कहा, "शोध से पता चला है कि बच्चों में इंटरनेट के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने से उनके अंदर ऑनलाइन जोखिम से निपटने की क्षमता का अभाव हो जाता है."

हालांकि एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के शोध से पता चला है कि ब्रिटेन में 15 साल के एक-तिहाई बच्चे "बहुत ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले" हैं.

नेशनल स्टैटिस्टिक के हवाले से शोध में बताया गया है कि 10 से 15 साल की उम्र के आधे अधिक बच्चे (56 फ़ीसदी) हर रोज़ ब्रिटेन में तीन घंटे से ज्यादा वक्त सोशल मीडिया पर बिताते हैं.

हालांकि 2013-14 के एक अध्ययन के मुताबिक़ इसी उम्र के एक तिहाई बच्चे सोशल मीडिया पर बिल्कुल भी समय नहीं बिताते.

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