प्रेग्नेंसी में कितना और क्या खाना चाहिए?

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ज़्यादातर महिलाओं को ये पता नहीं होता कि प्रेग्नेंसी में उन्हें कितना खाना चाहिए.

ब्रिटेन की नेशनल चैरिटी पार्टनरशिप की तरफ़ से कराए गए एक सर्वे के नतीज़े इस ओर इशारा करते हैं.

सर्वे में ये पाया गया कि मां बनने वाली महिलाओं में महज़ एक तिहाई को ही इस सवाल का सही जवाब पता है.

ब्रिटेन में लोगों के स्वास्थ्य पर नज़र रखने वाली एजेंसी 'नाइस' (NICE)की सलाह के मुताबिक गर्भावस्था के पहले छह महीने में महिलाओं को अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत नहीं पड़ती है.

लेकिन प्रेग्नेंसी के आख़िरी तीन महीनों में महिलाओं को हर दिन 200 कैलोरी एक्स्ट्रा लेना चाहिए. इतनी कैलोरी ऑलिव ऑयल में सेंकी गई दो ब्रेड में मिल जाती है.

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अजन्मे बच्चे के लिए...

नेशनल चैरिटी पार्टनरशिप का कहना है कि गर्भवती महिलाओं तक उनके खान-पान की जानकारी पहुंच नहीं पा रही है.

सर्वे में भाग लेने वाली 2100 महिलाओं में एक तिहाई ने माना कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान हर रोज़ 300 कैलोरी या उससे ज़्यादा लेनी चाहिए.

अमूमन ये माना जाता है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी में दो लोगों के लिए भोजन लेने की ज़रूरत है, एक तो खुद के लिए और दूसरा अजन्मे बच्चे के लिए

रॉयल कॉलेज ऑफ़ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनोकॉलोजिस्ट्स (RCOG) के साथ मिलकर नेशनल चैरिटी पार्टनरशिप इसी मिथक को झुठलाने के लिए काम कर रही है.

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कितना खाना चाहिए?

तो सवाल उठता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं कितना खाएं?

गर्भवती महिलाओं को अमूमन हर रोज़ 2000 कैलोरी की ज़रूरत पड़ती है. इसमें खाना और पीना दोनों शामिल है.

डॉक्टरों का कहना है कि खाना संतुलित होना चाहिए जिसमें फल और सब्ज़ियां, कार्बोहाइड्रेट्स (पास्ता और आलू), प्रोटीन (दाल, मछली, अंडा और मांस, दूध, दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स) और वसा शामिल हों.

रॉयल कॉलेज ऑफ़ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनोकॉलोजिस्ट्स के प्रोफेसर जैनिस राइमर कहते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान ज़्यादा खाने से महिलाओं को नुकसान हो सकता है.

वे कहते हैं, "महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान इतनी मोटी हो सकती हैं कि उनके गर्भपात का ख़तरा बढ़ सकता है. उनमें हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ की संभावना हो सकती है. समय से पहले बच्चा पैदा हो सकता है. सिज़ेरियन डिलेवरी की सूरत पैदा हो सकती है."

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