ऐसे लोग सेक्स को एंजॉय नहीं कर पाते

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जिस उम्र में पुरुष पहली बार पोर्न देखते हैं उसका असर बाद में उनकी ज़िंदगी और व्यवहार में नज़र आता है. नेब्रास्का यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने यह दावा किया है.

उनके सर्वे से पता चला कि जितनी कम उम्र में किसी पुरुष ने पोर्न फ़िल्में देखी होंगी, उतना ही ज़्यादा वह महिलाओं पर रौब जमाने की कोशिश करते हैं.

वहीं जितनी ज़्यादा उम्र के लोग पहली बार पोर्न देखते हैं, उनमें यौन संबंधों की इच्छा ज़्यादा होती है.

क़रीब 20 साल की उम्र के 330 अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट्स पर किए गए सर्वे में पता चला कि उन्होंने औसतन 13 साल की उम्र में पहली बार पोर्न फ़िल्में देखीं.

सबसे छोटी उम्र में जिस पुरुष ने पोर्न देखा तब वह पांच साल के थे, जबकि सर्वे में शामिल लोगों में से एक ने 26 साल की उम्र में पहली बार पोर्न देखा.

सर्वे में सामने आए ये आंकड़े अभी कहीं प्रकाशित नहीं हुए हैं. इन्हें वॉशिंगटन में एक सम्मेलन में रखा गया.

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प्लेबॉयलाइफ़स्टाइल

मुख्य शोधकर्ता एलिसा बिशमैन और उनकी टीम ने पुरुषों से सवाल किए जिससे पता चला कि उनमें ज़्यादातर लोग हेट्रोसेक्शुअल थे जब उन्होंने पहली बार पोर्न देखा, चाहे वह जानबूझकर हो, अचानक हो या भी जबरन दिखाया गया हो.

सर्वे के दौरान पुरुषों से 46 सवाल पूछे गए थे जिनके आधार पर यह तय किया गया कि वह महिलाओं पर रौब जमाना चाहते हैं या ज्यादा सेक्स और प्लेबॉय लाइफ़स्टाइल चाहते हैं.

टीम ने पाया कि जिन लोगों ने कम उम्र में पोर्न देखा है वह इस बात से सहमत थे कि पुरुष प्रधान समाज बेहतर है. उनका मानना था कि ''पुरुषों का प्रभुत्व होने से चीज़ें बेहतर रहती हैं.''

शोध टीम इस बात से हैरान थी कि उम्र ज़्यादा होने पर पोर्न देखने वालों में ज़्यादा सेक्स और जल्दी-जल्दी पार्टनर बदलने की इच्छा थी.

शोधकर्ता क्रिस्टीना रिचर्डसन ने कहा, ''ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जो लोग कम उम्र में पोर्न देख लेते हैं वो बाद में असल ज़िंदगी में सेक्स को उतना एंजॉय नहीं कर पाते.''

उन्होंने कहा, ''ऐसे लोगों के मन में महिलाओं के साथ असल ज़िंदगी में सेक्स को लेकर धारणाएं बनी होती हैं. लेकिन सेक्स का अनुभव प्लान करके या पोर्न फ़िल्मों की तरह नहीं होता.''

वो बताती हैं कि जो लोग उम्र बढ़ने पर पोर्न देखते हैं उनकी सेक्स लाइफ़ बेहतर होती है और पोर्न के असर की वजह से वह अलग-अलग पार्टनर की तलाश में रहते हैं.

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भेदभाव की भावना

हालांकि सर्वे को प्रेज़ेंट करने के दौरान यह नहीं बताया गया कि इन पुरुषों ने कितना और किस तरह का पोर्न देखा है. इसके अलावा व्यक्तित्व को लेकर भी कोई बात नहीं ज़ाहिर की गई.

सेक्स थेरेपिस्ट पीटर सैडिंगटन ने कहा, ''पोर्नोग्राफ़ी का असर ज़्यादातर युवा पुरुषों की सेक्शुअल लाइफ़ में होता है और हो सकता है.''

उनका मानना है कि पोर्न की वजह से युवाओं में लिंग के आधार पर भेदभाव की भावना भर जाती है और सेक्शुअली उनकी कुशलता कम होती है.

दूसरी तरफ, रिचर्डसन कहती हैं, ''पोर्न पुरुषों के लिए बिल्कुल सही चीज़ नहीं है.'' उन्होंने कहा कि युवाओं को पुरुषत्व के बारे में स्वस्थ विचारधारा के लिए बेहतर रोल मॉडल ढूंढने की ज़रूरत है.

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