मोटे हैं और फ़िट भी, तब भी चिंता कम नहीं

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ज़्यादा वज़न या मोटापा झेलने वाले लोग अगर मेडिकल पैमानों पर स्वस्थ दिखते हैं तो भी ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उनपर दिल की बीमारी का ख़तरा नहीं.

यूरोपियन हार्ट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों की राय उस मत के ख़िलाफ़ है जिसके तहत अब तक ये कहा जाता रहा है कि कोई व्यक्ति मोटा होकर भी फ़िट हो सकता है.

शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन समेत यूरोप के 10 देशों में क़रीब 5 लाख लोगों के हेल्थ डेटा की स्टडी के बाद यह निष्कर्ष निकाला है.

मोटे लोगों में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लग शुगर का स्तर सामान्य होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उन्हें हृदय रोगों का ख़तरा नहीं है.

स्टडी में 12 साल से ज़्यादा के फ़ॉलोअप के दौरान पाया गया कि कुल लोगों में से 7637 हृदय रोग से पीड़ित हो गए. ज़्यादा वज़न होना ख़तरे की घंटी माना जा रहा है.

स्टडी के मुताबिक़, ज़्यादा वज़न वाले या मोटापा झेल रहे लोगों में सामान्य ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के बावजूद एक सामान्य स्वस्थ आदमी के मुक़ाबले हृदय रोगों का ख़तरा 28 फ़ीसदी ज़्यादा होता है.

मोटापा और ख़राब पाचन प्रक्रिया से परेशान लोग हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के ख़तरे में ज़्यादा दिखे.

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वज़न पर कंट्रोल

इंपीरियल कॉलेज ऑफ़ लंदन और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने कहा कि ज़्यादा वज़न वाले लोगों के लिए ये शोध एक चेतावनी है.

इंपीरियल स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के डॉ. इओएना जॉउलाकी ने कहा, ''मुझे लगता है कि अब मोटापे के बावजूद स्वस्थ होने का कॉन्सेप्ट नहीं रहा.''

उन्होंने कहा, ''हमारी स्टडी में ज़्यादा वज़न वाले जिन लोगों को संभवत: स्वस्थ क़रार दिया गया है उनमें अभी किसी तरह की समस्या नहीं है, लेकिन आगे चलकर वो हार्ट अटैक का शिकार भी हो सकते हैं.''

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, ज़्यादा वज़न की वजह से सीधे तौर पर हृदय रोगों का ख़तरा नहीं दिखता, लेकिन इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हाई ग्लूकोज़ की समस्या हो सकती है.

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के प्रोफ़ेसर मेटिन एवकिरन ने कहा, ''स्टडी में जो सबसे काम की बात सामने आई है वो ये है कि वज़न पर काबू पाना सबसे ज़रूरी है. इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है.''

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