साठ की उम्र में जवान बने रहने का राज़

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Image caption डॉक्टर की सलाह पर ग्राहम दो साल पहले पदैल चलने वाले ग्रुप से जुड़े थे

ग्राहम वॉर्ड की उम्र 60 साल थी जब उन्हें टाइप-2 डायबिटीज का पता चला. खूब खाने-पीने की आदत और लगातार बैठकर नौकरी करने के दशकों बाद उन्हें बीमारी का पता चला.

वे कहते हैं, "ये ख़बर किसी धमाके की तरह थी, जिसका इंतज़ार किया जा रहा था."

ग्राहम की पत्नी को भी बढ़ती उम्र की बीमारियों ने शारीरिक रूप से अक्षम कर दिया था. इसके बाद वो सतर्क हो गए. ग्राहम बताते हैं, "मुझे मेरी पत्नी के आस-पास रहना होता है और उसे मेरी ज़रूरत होती है."

ग्राहम इस बीमारी से जूझने वाले अकेले नहीं हैं. ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के मुताबिक, 45 से 64 साल के 42 फीसदी लोग डायबिटीज और हृदय रोग की बीमारी की चपेट में आते हैं.

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Image caption ग्राहम 2015 में ताजमहल घूमने आए थे, जब वह डायबिटीज से ग्रसित थे.

फिट रख रही मोबाइल ऐप

सरकार ने इस उम्र के लोगों को अधिक चलने की अपील की है. इससे 40 से 60 साल के उम्र के लोग पैदल चलने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं. इस उम्र के पांच में से एक व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है. विभाग के मुताबिक वे हर हफ्ते 30 मिनट व्यायाम करते हैं.

लोगों को फिट रखने के लिए सरकार मोबाइल ऐप एक्टिव 10 को बढ़ावा दे रही है. यह लोगों को उनके चलने-फिरने और जरूरी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने की सलाह देती है.

जब ग्राहम को बीमारी के बारे में पता चला, उन्होंने कई बदलावों को महसूस किया. उन्होंने कहा, "मेरे कपड़े तंग होने लगे थे. लोग कहते थे कि ज्यादा वजन मेरी जिंदगी को प्रभावित करेगा."

डायबिटीज से दिल और किडनी की बीमारी भी जुड़ी होती है और यह उम्र को कम करती है. वह कहते हैं कि उन्होंने इन सभी बातों को नज़रअंदाज़ किया. ग्राहम के डॉक्टर ने उन्हें स्टॉकपोर्ट में पैदल चलने वाले ग्रुप से जुड़ने की सलाह दी.

वो कहते हैं, "मैंने शुरुआत की पर मैं थोड़ा नर्वस था. पहले के मुकाबले मुझे ज्यादा चलना होता था."

पैदल चलने वाले ग्रुप के लीडर उन्हें 1.9 मील चलने को कहते थे. उन्होंने बताया, "पहली बार चलने के बाद मेरे मन से सभी डर निकल गए." ग्राहम ने धीरे-धीरे पांच मील तक चलने की आदत डाली.

मोटे हैं और फ़िट भी, तब भी चिंता कम नहीं

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Image caption एक महीने में ग्राहम ने तीन किलोमीटर से आठ किलोमीटर तक चलने की आदत बनाई

रोज 15 हजार कदम चलते हैं

उन्होंने कहा, "मुझमें तेज़ी से सुधार हो रहा था. मैंने महसूस किया कि एक-दो मील चलने के बाद भी मेरी सांसे तेज नहीं होती थी और मैं अधिक चलने की कोशिश करता था. मैं पैदल चलने वाले ग्रुप से अलग हो गया और खुद अकेले ज्यादा चलने लगा. मेरा वजन भी कम होने लगा था."

ग्राहम कदमों को मांपने वाला यंत्र पैडोमीटर इस्तमाल करने लगे. वह यंत्र के मुताबिक 10 हजार कदम रोज चलते थे. अब वह रोज 15 हजार कदम चलते हैं और करीब 23 किलोग्राम तक अपना वजन कम कर चुके हैं.

वह कहते हैं, "मेरे पतलून अब ढीले होने लगे हैं. मैंने अपने पुराने कपड़े फेंक दिए हैं." ग्राहम कहते हैं कि उन्हें सिर्फ शारीरिक फायदा नहीं पहुंचा है, "मैं फिट हूं. मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है. जब आप घूमना शुरू करते हैं तो कई ऐसी चीजें देखते हैं जो आपने पहले नहीं देखी होती है."

अब वह अपनी पत्नी के साथ तैराकी भी करते हैं. ग्राहम कहते हैं, "जब मैं अपने पोते-पोतियों के साथ खेलता हूं तो मैं नहीं, वे मेरा पीछा करते हुए थकते हैं."

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