संगीत और सेक्स का संबंध

सेक्स से जुड़ा सामान बेचने वाली दुकान
Image caption किशोरों में उत्तेजक संगीत सुनने की आदत देखी जाती है.

कामोत्तेजक शब्दों वाले संगीत को सुनना किशोरों को कम उम्र में ही यौन संबंध बनाने के लिए उकसा सकता है.

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने 711 किशोरों से उनके यौन जीवन और संगीत सुनने की आदतों से संबंधित सवाल पूछे.

उन्होंने पाया कि जो किशोर रोज़ाना कामोत्तेजक शब्दों वाला संगीत सुनते थे, उनमें यौन संबंध बनाने की संभावना दोगुनी थी.

लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि संगीत और व्यवहार में सीधा संबंध निकालना एकतरफ़ा है.

अमेरिकन जर्नल ऑफ़ प्रिवेंटेटिव मेडिसिन के अनुसार, "इस टीम ने उन कामुकतापूर्ण गीतों को अलग वर्ग में रखा जिनमें सेक्स को प्यार की बजाय शारीरिक रूप दिया गया था या जिनमें इसे ताकत से जोड़ा गया था."

तीन वर्ग

शोधार्थियों ने उन गीतों का नाम बताने से इनकार कर दिया जिन्हें कामुकतापूर्ण की श्रेणी में रखा गया था.

उन्होंने 13 से 18 उम्र वर्ग के किशोरों के तीन ग्रुप बनाए- वे जो ऐसा संगीत रोज़ सुनते थे, कभी कभी सुनते थे और बहुत कम सुनते थे.

रोज सुनने वालों को 17.6 घंटे प्रति सप्ताह के वर्ग में जबकि बहुत कम सुनने वालों को 2.7 घंटे वाले वर्ग में रखा गया.

उन्होंने पाया कि रोज़ ऐसा संगीत सुनने वालों में 45 फ़ीसदी किशोर यौन संबंध बनाते थे जबकि कम संगीत सुनने वालों में ऐसे मामले सिर्फ़ 21 फ़ीसदी थे.

प्रमुख शोधार्थी डॉ ब्रायन प्रीमैक ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि इनके बीच निश्चित रूप से कोई संबंध है लेकिन यह कहना मुश्किल है कि संगीत सुनना यौन संबंध बनाने के लिए उकसाता रहा है."

उन्होंने कहा, "हालाँकि इस मामले में अभिभावकों को सोचना चाहिए."

अभिभावकों की भूमिका

उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि अभिभावकों को ऐसे संगीत को प्रतिबंधित कर देना चाहिए क्योंकि उससे कुछ हासिल नहीं होगा."

डॉ प्रीमैक ने कहा, "लेकिन उन्हें संगीत का संदर्भ देते हुए सेक्स के बारे में अपने बच्चों से बात करनी चाहिए."

लेकिन ब्रिटेन के विशेषज्ञ किशोरों के यौन संबंधों में संगीत की भूमिका से सहमत नहीं हैं.

युवाओं के यौन स्वास्थ्य के लिए काम करने वाली संस्था ब्रिक की प्रवक्ता का कहना है, "ज़ाहिर है कि सांस्कृतिक वातावरण इसमें ख़ासी भूमिका निभाता है लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि इनके बीच संबंध है."

परिवार कल्याण एसोसिएशन की रेबेका फ़िंडले मानती हैं कि यौन व्यवहार को एक अकेले कारक पर ही आधारित नहीं माना जा सकता.

उन्होंने कहा, "मैं समझती हूँ कि यह किशोरों के लिए बेहतर सेक्स शिक्षा की महत्ता को दर्शाता है."

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