तारेगना में होगा सबसे ख़ास नज़ारा

इक्कीसवीं सदी का सबसे अनोखा खग्रास यानी पूर्ण सूर्यग्रहण बुधवार की सुबह देखा जाएगा. दुनियाभर की नज़र इस सदी के इस सबसे लंबी अवधि वाले सूर्यग्रहण पर होगी.

सूर्यग्रहण बिहार की राजधानी पटना के पास स्थित तारेगना में सबसे अधिक समय तक दिखेगा. ऐसे में तारेगना और पटना में उत्सव जैसा माहौल है.

इस सूर्यग्रहण को देखते हुए पटना शहर में कहीं गीत-संगीत और फ़िल्मों के ज़रिए तो कहीं सेमिनार और वर्कशॉप के सहारे अंतरिक्ष पर चर्चाएं हो रही हैं.

जानकारों का कहना है कि लगभग 15 सौ साल पहले इस स्थान पर स्थापित अपनी वेधशाला से भारत के महान खगोल शास्त्री आर्यभट्ट और उनके शिष्य अंतरिक्ष की गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया करते थे. ऐसा माना जाता है कि इस जगह का संस्कृत नामाकरण तारक-गणना कालांतर में तारेगना कहा जाने लगा.

तारेगना में जमावड़ा

सूर्यग्रहण को देखते हुए देश-विदेश के सौ से अधिक अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का जमावड़ा पटना और तारेगना में है. इन वैज्ञानिकों के दल में नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

सूयर्ग्रहण को देखने की तैयारी

पटना से लेकर तारेगाना के ऑब्ज़्रवेशन सेंटर तक टेलीस्कोप और अन्य खगोलीय उपकरण लगाए गए हैं

ये वैज्ञानिक इस बात से उत्साहित हैं कि तारेगना सूर्यग्रहण के 'सेंट्रल लाइन' पर स्थित है ऐसे में यहाँ ग्रहण को साफ़ और अधिक समय तक देखने-परखने में आसानी होगी.

बिहार सरकार का साइंस एंड टेक्नॉलॉजी विभाग पटना में वैज्ञानिकों को हर संभंव सहयोग देने में जुटा है.

पटना में कुल मिलाकर दो घंटे के ग्रहण के दौरान पूर्ण सूर्यग्रहण की अवधि तीन मिनट 48 सेंकड होगी. इसे 21वीं सदी का सबसे लंबी अवधि वाला पूर्ण सूर्यग्रहण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह प्रशांत महासागर में छह मिनट 39 सेकेंड तक दिखेगा.

21वीं सदी के इस अंतिम पूर्ण सूर्यग्रहण के बाद अब वर्ष 2114 में ऐसा मौक़ा आएगा. इसका मतलब ये हुआ कि पृथ्वी पर जीवित लोगों में शायद ही कोई इतना दीर्घ जीवी होगा जिन्हे दोबारा ऐसा पूर्ण सूर्यग्रहण देखने का मौक़ा मिल सकेगा.

पटना के तारामंडल और गाँधी मैदान से लेकर तारेगना के ऑब्ज़्रवेशन सेंटर तक बड़े-बड़े टेलीस्कोप और अन्य खगोलीय उपकरण लगाए गए हैं.


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