समलैंगिकों में एचआईवी संक्रमण ज़्यादा

एक ओर जब भारत में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकों के बीच आपसी रज़ामंदी से यौन संबंधों को जायज़ क़रार देने के उच्च न्यायालय के फ़ैसले पर रोक से इनकार किया है, अफ़्रीका में समलैंगिकों के साथ भेदभाव किए जाने और उन्हें दुत्कारे जाने के ख़तरे की बात सामने आई है.

प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका लाँसेट में छपे एक नए अध्ययन के अनुसार अफ़्रीका के कुछ देशों में समलैंगिक पुरुषों के बीच एचआईवी संक्रमण की दर औसत से दस गुना ज़्यादा है.

ये अनुसंधान ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने सहारावर्ती अफ़्रीकी देशों में किया है.

इसके तहत उन्होंने एड्स के विषाणु, एचआईवी से संक्रमित पुरुषों के बारे में छह साल के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया.

एचआईवी संक्रमित पुरुषों का प्रतिशत अलग-अलग देशों में अलग-अलग रहा, लेकिन ख़ास कर पश्चिम अफ़्रीका के कुछ देशों में सामान्य पुरुष आबादी के मुक़ाबले समलैंगिक पुरुषों के समूह में संक्रमण 10 गुना ज़्यादा पाया गया.

समलैंगिकों की उपेक्षा

पुरुषों के बीच समलैंगिकता को लेकर अफ़्रीकी समाज के हर स्तर पर अस्वीकार्यता और शत्रुता का भाव देखा जा सकता है. इस कारण इस समुदाय तक आसानी से पहुँच पाना संभव नहीं हो पाता है

एड्रियन स्मिथ, अध्ययन दल के सदस्य

अफ़्रीका के अधिकतर देशों में समलैंगिकों को बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. उन्हें डराया धमकाया जाता है, तंग किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस माहौल का असर अफ़्रीकी समलैंगिक पुरुषों में असुरक्षित यौन व्यवहार में देखा जा सकता है.

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के दल ने पाया कि अफ़्रीकी समाज में समलैंगिक पुरुषों के बारे में आंकड़े जुटाना भी आसान नहीं है. अध्ययन दल के सदस्य एड्रियन स्मिथ इस बारे में बताते हैं, "पुरुषों के बीच समलैंगिकता को लेकर अफ़्रीकी समाज के हर स्तर पर अस्वीकार्यता और शत्रुता का भाव देखा जा सकता है. इस कारण इस समुदाय तक आसानी से पहुँच पाना संभव नहीं हो पाता है."

इस सामाजिक अस्वीकार्यता को जॉर्ज कनुमा भलीभाँति जानते हैं. कनुमा बुरुंडी में समलैंगिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता है, जहाँ सरकार ने हाल ही में समलैंगिता को अवैध घोषित कर दिया है.

उनका कहना है कि बुरुंडी में इलाज़ के लिए आए समलैंगिक पुरुषों को डॉक्टरों द्वारा बैरंग लौटाया जाना आम बात है.

लेकिन कनुमा की ज़्यादा बड़ी चिंता लोगों में एचआईवी-एड्स के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने को लेकर हैं.

जानकारी की कमी

समलैंगिक युगल

उनका कहना है कि बहुत से लोग ये मानने से भी इनकार करते हैं कि पुरुषों में समलैंगिक यौन संबंध से एचआईवी संक्रमण का ख़तरा हो सकता है, "हमने देखा है कि समलैंगिक पुरुष सामान्य वैवाहिक जीवन बिताने के लिए अपनी यौन प्रवृति की जानकारी छुपाते हैं. उनमें से अधिकतर के बीवी-बच्चे हैं, इसके बाद भी वे पुरुषों से यौन संबंध बनाते हैं. और उनमें से अधिकतर का यही मानना है कि महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने से उन्हें एचआईवी-एड्स या अन्य यौनजनित बीमारियाँ हो सकती हैं, लेकिन पुरुषों के साथ संबंध बनाने से नहीं."

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया भर में सवा तीन करोड़ से ज़्यादा लोग एचआईवी संक्रमित हैं. इनमें से 70 प्रतिशत सहारावर्ती अफ़्रीकी देशों में हैं.

लाँसेट में छपी रिपोर्ट में विशेषज्ञों की राय को प्रमुखता दी गई है कि जागरुकता बढ़ाने, बचाव के उपायों को बढ़ावा देने और शिक्षा पर ज़ोर देने जैसे उपायों से ही समलैंगिक समुदाय में एचआईवी के ख़तरे को कम किया जा सकता है.

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