भारत में कहीं सूखा, कहीं बाढ़

कहीं सूखा, कहीं बाढ़
Image caption गुजरात के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति है लेकिन अनेक अन्य राज्य सूखे की चपेट में हैं

जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भारत में मॉनसून अलग-अलग राज्यों में इस तरह से आया है कि कहीं बाढ़ आ रही है तो कहीं सूखा पड़ा है. केंद्र सरकार ने माना है कि इस बार मॉनसून में औसत से लगभग 19 प्रतिशत कम पड़ी है.

पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं. वे चिंता जता रहे हैं कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस बारे में सचेत नहीं हैं जिसके कारण आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और यदि पर्याप्त क़दम नहीं उठाए गए तो ग़रीबी भी बढ़ सकती है.

जहाँ गुजरात के सौराष्ट्र में बाढ़ की स्थिति है वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब में बारिश औसत से ख़ासी कम रही है. आंध्र प्रदेश में मॉनसून कमज़ोर पड़ रहा है लेकिन महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश अच्छी हुई है. बिहार में तो पिछले साल कोसी में बाढ़ आई थी और लाखों प्रभावित हुए थे लेकिन इस साल ये राज्य सूखे की चपेट में है.

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के चंद्र भूषण का कहना है, "जलवायु परिवर्तन एक हकीकत बन गया है और इसी के कारण मॉनसून पहले की तरह नहीं आ रहा है. पिछले पाँच साल में भारत में हुए शोध के मुताबिक भारत के पूर्वोत्तर में कम बारिश पड़ेगी जबकि पश्चिमी भाग में अधिक बारिश होगी और बाढ़ भी अधिक देखने को मिल सकती है. तटवर्ती इलाक़ों - बंगाल, उड़ीसा में चक्रवात आएँगे."

उनका कहना है, "ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं. ज़रूरत कृषि में बदलाव लाने की है. सूचना तकनीक से किसान फ़ायदा उठा सकें, इसकी ज़रूरत है. नहीं तो किसान तबाह हो जाएगा और ग़रीबी बढ़ेगी. राजनीतिक नेताओं को विज्ञान से संबंधित इस बदलाव को समझने की ज़रूरत है.

भारत में फैले बीबीसी के संवाददाताओं ने विभिन्न राज्यो में बाढ़ या फिर सूखे की स्थिति और लोगों की मुश्किलों का आकलन किया है जो इस प्रकार है:

गुजरात

गुजरात से स्थानीय पत्रकार अजय उम्मट के अनुसार, "गुजरात में दक्षिणी क्षेत्र डांग में जहाँ अच्छी बारिश होती है वहाँ अब तक केवल 15 इंच बारिश हुई है. वहीं सौराष्ट्र में जहाँ 20-22 इंच बारिश होती है, वहाँ अब तक 50 इंच बारिश हो गई है. इससे लगभग 25 से 30 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं. पोरबंदर और आसपास के इलाक़े में ख़तरा अब भी बना हुआ है."

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री जय नारायण व्यास ने बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर को बताया, "पोरबंदर में भारी बारिश हुई है और जामनगर से 60 हज़ार खाद्य पदार्थों के पैकेट भेजे गए हैं. वहाँ 18 चिकित्सक दल भी रवाना किए गए हैं और कुछ और दल भी भेजे जाएँगे. वहाँ ख़तरे को देखते हुए बिजली की सप्लाई बंद करनी पड़ी थी लेकिन अब बहाल कर दी गई है." गुजरात के कई मंत्रियों ने प्रभावित इलाक़ो का दौरा किया है.

दक्षिण भारत

इस मॉनसून में आंध्र प्रदेश मेंसामान्य से 20 से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है. बीबीसी संवाददाताउमर फ़ारूक़ के अनुसार,"मौसम विभाग के अनुसार आंध्र प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों में बारिश 20 से 50 प्रतिशत कम हुई है. अब मॉनसून आंध्र प्रदेश में कमज़ोर पड़ रहा है जो वहाँ के किसानों के लिए अच्छी ख़बर नहीं है."

उधरकर्नाटक में अच्छी बारिश हुई है जिसका तमिलनाडु को भी फ़ायदा हुआ है. कावेरी नदी में ख़ासा पानी आया है जिसके कारण कर्नाटक ने पड़ोसी राज्य के लिए भी कावेरी नदी में काफ़ी पानी छोड़ा है. कर्नाटक सरकार के अनुसार इसके कारण कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी के मसले पर फ़िलहाल तो तनाव ख़त्म ही हो गया है.

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में मॉनसून के पहले चरण में हाल में ही सरकार ने 20 ज़िलों के सूखा ग्रसित होने की घोषणा की है.

बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार, "उत्तर प्रदेश का लगभग कोई भी ऐसा ज़िला नहीं है जहाँ संतोषजनक बारिश हुई है. राज्य में किसान काफ़ी तकलीफ़ में हैं. धान की बात करें तो 50 फ़ीसदी से ज़्यादा फ़सल नष्ट हो गई है. सरकार ने किसानों को राहत देने की बात की है."

बिहार

बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार, "बिहार में जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बारिश इतनी कम हुई है कि लगभग पूरा राज्य सूखे की चपेट में है."

उनके अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि इस मौसम में राज्य में लगभग 35 हज़ार हेक्टेयर में धान की फ़सल बोई जाती थी लेकिन इस बार यह घटकर केवल छह हज़ार हेक्टेयर में ही बीई जा चुकी है.

उनका कहना है कि राज्य सरकार ने माँग की है कि बिहार में सूखे का जायज़ा लेने के लिए केंद्र सरकार अपनी टीम भेजे और विशेष पैकेज की घोषणा करे.

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