'तेज़ी से गिर रहा है भूजल स्तर'

Image caption शोध के मुताबिक सिंचाई में काफ़ी पानी इस्तेमाल होता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में भूजल स्तर तेज़ी से गिरता जा रहा है और लाखों लोगों के लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे.

नेचर पत्रिका में शोधकर्ताओं ने लिखा है कि सिंचाई और दूसरे मकसदों के लिए के लिए पानी की खपत सरकारी अनुमान से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है.

इस कारण कृषि उत्पादन ठप्प हो सकता है और पीने के पानी की भारी किल्लत हो सकती है.

भूजल उस पानी को कहा जाता है जो बारिश और अन्य स्रोत्रों के कारण ज़मीन में चला जाता है और जमा होता रहता है.

नए शोध के मुताबिक उत्तर भारत में भूजल स्तर 2002 से 2006 के बीच हर साल चार सेंटीमीटर नीचे गया है.

चिंताजनक स्थिति

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में बहुत ज़्यादा पानी बर्बाद हुआ है. वैज्ञानिकों ने इन बदलावों को समझने के लिए उपग्रह से मिले आकड़ों का इस्तेमाल किया है.

उनके मुताबिक पानी के गिरते स्तर का कारण मौसम में बदलाव नहीं है क्योंकि जिस दौरान ये शोध किया गया था उस दौरान बारिश में कमी दर्ज नहीं की गई थी.

वैज्ञानिकों का तर्क है कि इसका मुख्य कारण मनुष्यों की विभिन्न गतिविधियाँ हैं, ख़ासकर सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल.

इस शोध का मुख्य काम नासा गोदार्द स्पेस फ़्लाइट केंद्र के डॉक्टर मैथ्यू रोडेल ने किया है.

वे कहते हैं, “भूजल के गिरते स्तर के बारे में भारत सरकार को पता है लेकिन शोध बताता है कि गिरने का स्तर अनुमान से कहीं ज़्यादा है.”

हालांकि डॉक्टर मैथ्यू कहते हैं कि अब भी कई क़दम उठाए जा सकते हैं.

पानी के गिरते स्तर के साथ एक बड़ी समस्या ये है कि बारिश ज़्यादा होने का भी इसपर उतना असर नहीं पड़ता जितना नदियों या झीलों के स्तर पर पड़ता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक भूजल स्तर को पहले के स्तर पर लाने में कई वर्ष लगेंगे.

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