कृत्रिम कोशिका बनाने से बस थोड़ी दूर

बैक्टीरिया
Image caption वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसी कोशिकाओं के निर्माण से ऊर्जा संकट दूर हो सकता है.

विवादास्पद वैज्ञानिक क्रेग वेंटर ने दावा किया है कि वो दुनिया में कृत्रिम कोशिका बनाने से मात्र एक क़दम दूर हैं.

वेंटर की अगुआई में वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया पर किए गए एक प्रयोग में बैक्टीरिया के गुणसूत्र को अलग किया और फिर उसे खमीर में डाला जिसमें एक नई कोशिका का निर्माण किया गया.

इस नई कोशिका को एक अन्य बैक्टीरिया में लाने में भी वैज्ञानिकों को सफलता मिली.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कृत्रिम कोशिका बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम है.

डॉ वेंटर क़रीब दस वर्ष पहले उस समय ख़बरों में आए थे जब उन्होंने मानव गुणसूत्रों का पेटेंट करने और उसके व्यवसायिक उपयोग की बात कही थी.

इस मुद्दे पर काफी विवाद हुआ था और अब उनके आलोचकों का कहना है कि वेंटर पृथ्वी पर कृत्रिम जीवन लाने की कोशिश कर रहे हैं जो नैतिकता के ख़िलाफ़ है.

हालांकि उनके नए प्रयोग को फिलहाल मानव क्लोनिंग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है. यह इस समय सूक्ष्म जीवों यानी बैक्टीरिया से जुड़ा हुआ है. इस प्रयोग में उन्होंने बैक्टीरिया और खमीर की कोशिकाओं के साथ उलटफेर किया है.

डॉ वेंटर ने दावा किया है कि इस प्रयोग की सफलता से दुनिया की ऊर्जा समस्याएं दूर हो सकती हैं. उनका कहना था कि नई कोशिकाओं का निर्माण इस तरह से किया जा सकता है कि वो सूर्य से ऊर्जा बनाने में सक्षम हों जिससे की प्राकृतिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो सके.

लेकिन इस बात को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है कि इससे नए तरह के अप्राकृतिक सूक्ष्म जीवों के निर्माण की बाढ़ आ सकती है.

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