फेफड़ों के कैंसर की पहचान का नया तरीका

Image caption फेफड़े के कैंसर से हर साल तेरह लाख लोगों की मौत होती है

इसराइल में वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने सांस के ज़रिए फेफड़े के कैंसर की पहचान का एक नया तरीक़ा ईजाद किया है.

इन वैज्ञानिकों ने नैनो तकनीक पर आधारित एक संवेदी यंत्र विकसित किया है और उनका दावा है कि यह यंत्र मरीज की सांस के ज़रिए इस रोग की पहचान करने में सक्षम है.

वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि ये तकनीक उन डॉक्टरों के लिए काफ़ी सस्ती साबित होगी जो अपने मरीजों की सांस की रोज़ाना जांच करते हैं.

इस शोध के प्रमुख डॉक्टर हॉसम हैक का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर की जांच के परंपरागत तरीक़े इसलिए कम व्यावहारिक थे क्योंकि ये मंहगे होने के साथ ही कई बार सही परिणाम भी नहीं देते थे.

डाक्टरों का ये भी कहना है कि ये तकनीक क़रीब 86 प्रतिशत सही परिणाम देती है और इससे डाक्टरों को सही समय पर रोग की पहचान करने में आसानी में होगी.

चूंकि अभी स्थिति ये है कि जब तक रोग की पहचान होती है तब तक काफ़ी देर हो चुकी होती है और इसका इलाज काफ़ी मुश्किल हो जाता है.

फेफड़े का कैंसर मुख्य रूप से धूम्रपान की वजह से होता है और दुनिया भर में ये सबसे जानलेवा कैंसर है.

फेफड़े के कैंसर से दुनिया भर में क़रीब 13 लाख लोगों की मौत होती है.

इस रोग से सिर्फ़ 15 प्रतिशत लोग ही पांच साल से ज़्यादा जीवित रह पाते हैं कि क्योंकि रोग की पहचान काफी देरी से हो पाती है.

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