भारत ने एक साथ सात उपग्रह छोड़े

Image caption भारत अंतरिक्ष बाज़ार का अहम खिलाड़ी बन गया है.

भारत ने बुधवार को एक ही अभियान में सात उपग्रहों को अंतरिक्ष के लिए रवाना कर दिया है.

यह रॉकेट एक भारतीय उपग्रह और छह छोटे उपग्रहों को लेकर उड़ा और ये सभी छोटे उपग्रह विदेशों में बने हैं.

पोलर सेटेलाइट लॉन्च वेहिकल (पीएसएलवी) नामक ये रॉकेट भारतीय उपग्रह ओशनसैट 2 और छह अन्य नैनो सैटेलाइट को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के श्रीहरिकोटा केंद्र से छोड़ा गया.

ओसनसैट 2 को पीएसएलवी पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मौके पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है. लॉन्च के दौरान मौजूद उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिकों ने भारत का नाम और रौशन किया है.

ये उपग्रह पांच साल तक काम करेगा और माना जा रहा है कि पहले संस्करण की तरह ये लंबे समय तक भी चल सकता है.

ओशनसैट 2 उपग्रह मौसम की जानकारी जुटाएगा और मछली की बहुलता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा. इस सेटेलाइट से भारतीय मौसम विभाग और मत्स्य विभाग को काफी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

इसरो के एक प्रवक्ता एस सतीश ने बीबीसी को बताया कि ओशनसैट 2 एक ऐसा उपकरण लेकर गया है जो समुद्री सतह के ऊपर हवा की गति को माप सकता है. उनका कहना है कि इस उपकरण से मॉनसून और तूफ़ान का भी अंदाज़ा लगाया जा सकेगा.

साइंस मैगज़ीन के दक्षिण एशिया संवाददाता पल्लव बागला बताते हैं," जब मछली पकड़ने के लिए मछुआरा निकलता है तो उसे ये पता नहीं होता कि मछलियां कहां ज़्यादा है. पर ये सैटेलाइट देख पाता है कि यहां ज़्यादा मछलियां है."

बड़ी सफलता

जानकारों का कहना है कि भारत अरबों डॉलर के अतंरिक्ष बाज़ार का एक अहम खिलाड़ी बनकर उभर रहा है.

एक महीने पहले चंद्रयान मिशन के असफल हो जाने के बाद बुधवार का ये अभियान भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.

पिछले साल भारत ने एक ही अभियान में दस उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था.

इस बार अंतरिक्ष में रवाना किए गए छह विदेशी उपग्रहों में से चार जर्मनी और एक एक स्विटज़रलैंड और तुर्की के हैं. ये सेटेलाइट यूरोपीय देशों, वहां के विश्वविद्यालयों के शिक्षा और प्रयोग के लिए इस्तेमाल में आने वाले सेटेलाइट हैं.

पीएसएलवी का ये 16वां अभियान है. रॉकेट की ऊँचाई सात मंज़िला इमारत के बराबर है, इसका वज़न 230 टन है और इसकी कीमत है 160 करोड़ रुपए.

भारत ने अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम 1963 में शुरू किया था और उसके बाद से अपने बनाए हुए उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज चुका है.

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