चाँद पर पानी के सुराग

भारतीय अंतरिक्ष यान चंद्रयान को चाँद पर पानी की मौजूदगी के सुराग मिले हैं.

चंद्रयान अपने साथ अमरीकी उपकरण भी लेकर गया था और इन्हीं उपकरणों के माध्यम से चाँद की सतह पर पानी के सबूत मिले हैं.

ये पानी किसी झील के रुप में मौजूद नहीं है लेकिन धूल और चट्टानों के टुकड़ों में बंद है. और पानी की मात्रा बेहद कम है.

दरअसल चांद धरती के किसी भी मरुस्थल से भी ज़्यादा सूखा है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि चाँद की सतह पर मिलने वाली मिट्टी में जो नमी के अंश हैं उसकी प्रोसेसिंग से भविष्य में वहाँ बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ उपलब्ध हो सकता है.

माना जा रहा है कि सौर्य वायु में हाइड्रोजन के अणु और चाँद की सतर पर मौजूद मिट्टी के मिश्रण से वहाँ नमी पैदा हुई है.

इससे पहले चाँद के पास उन गढ्ढ़ों (क्रेटर) पर बर्फ़ पाई गई थी जहां सूर्य की किरणें नहीं पहुंचती.माना जाता है कि बर्फ़ कॉमेट से आई थी.

चंद्रयान

चंद्रयान के ज़रिए चाँद पर पानी के सुराग मिलने को भारत के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.

चंद्रयान को अक्तूबर 2008 में श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था.

चंद्रयान पर कुल 11 वैज्ञानिक उपकरण थे जिनमें से छह विदेशी एजेंसियों के थे- दो अमरीकी, तीन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और एक बुल्गारिया का उपकरण. बाक़ी के पाँच उपकरण भारतीय थे जिन्हें इसरो ने तैयार किया था.

अंतरिक्ष में पहुँचने में सफल रहे चंद्रयान-1 ने वहाँ से तस्वीरें भी भेजी थीं. लेकिन अगस्त 2009 में चंद्रयान का नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया था और इसके साथ ही ये मिशन समाप्त हो गया.

चंद्रयान ने चंद्रमा की कक्षा में करीब 312 दिन बिताए और बड़ी मात्रा में आँकड़े भेजे. क़रीब 400 करोड़ की लागत से चंद्रयान-1 अंतरिक्ष में भेजा गया था.

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान को जो काम करना था उसमें से 95 प्रतिशत काम पूरा हो गया था यानी चंद्रयान ने बड़ी मात्रा में ज़रुरी आकड़े भेज दिए थे.

चंद्रयान के प्रक्षेपण के ज़रिए भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया जिन्होंने चाँद पर कोई यान भेजा हो.

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