'चांद के पानी का इस्तेमाल संभव'

माधवन नायर
Image caption माधवन नायर ने चंद्रयान मिशन को सफल बताया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने कहा है कि चंद्रयान-1 ने जो जानकारियाँ जुटाई हैं उससे चांद पर पानी की मौजूदगी के सबूत तो मिले ही हैं, साथ ही पानी की उपलब्धता भी उम्मीद से कहीं ज़्यादा है.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने गुरुवार को चंद्रमा पर पानी के सबूतों की पुष्टि की थी.

चंद्रमा पर पानी के सबूतों की खोज को मील का पत्थर करार देते हुए इसरो के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने उम्मीद जताई कि चांद पर मिले पानी का इस्तेमाल भी संभव है.

बंगलौर में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1 अभियान 110 फ़ीसदी सफल रहा, हालांकि पहले उन्होंने कहा था कि अभियान ने अपने 95 प्रतिशत उद्देश्यों को हासिल किया है.

गर्व

नायर ने कहा, "भारतीय होने के नाते हमें अपने चंद्रयान पर गर्व है चंद्रमा पर पानी की खोज जैसा महत्वपूर्ण काम किया है."

उन्होंने कहा कि इस खोज ने इस धारणा को तोड़ा है कि चंद्रमा सूखा है. हालांकि चंद्रमा पर पानी हमारे यहाँ मौजूद सागर या झीलों की शक्ल में नहीं है बल्कि ये चट्टानों और खनिज लवण में है.

इससे पहले नासा ने गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस ऐतिहासिक खोज के लिए इसरो को बधाई दी और नासा के साथ सहयोग के लिए उसका धन्यवाद किया.

नासा के निदेशक जिम ग्रीन का कहना था, "चंद्रयान के साथ तीन उपकरण थे जिसमें अमरीकी उपकरण एमक्यू भी था. इसने जो जानकारियाँ जुटाई वो चौंकाने वाले हैं. अब हम कह सकते हैं कि चांद पर पानी मौजूद है."

चंद्रयान

चंद्रयान को अक्तूबर 2008 में श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था.

Image caption चंद्रयान पर अमरीकी उपकरण भी लगे हुए थे

चंद्रयान पर कुल 11 वैज्ञानिक उपकरण थे जिनमें से छह विदेशी एजेंसियों के थे- दो अमरीकी, तीन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और एक बुल्गारिया का उपकरण. बाक़ी के पाँच उपकरण भारतीय थे जिन्हें इसरो ने तैयार किया था.

अंतरिक्ष में पहुँचने में सफल रहे चंद्रयान-1 ने वहाँ से तस्वीरें भी भेजी थीं. लेकिन अगस्त 2009 में चंद्रयान का नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया था और इसके साथ ही ये मिशन समाप्त हो गया.

चंद्रयान ने चंद्रमा की कक्षा में करीब 312 दिन बिताए और बड़ी मात्रा में आँकड़े भेजे. क़रीब 400 करोड़ की लागत से चंद्रयान-1 अंतरिक्ष में भेजा गया था.

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान को जो काम करना था उसमें से 95 प्रतिशत काम पूरा हो गया था यानी चंद्रयान ने बड़ी मात्रा में ज़रुरी आकड़े भेज दिए थे.

चंद्रयान के प्रक्षेपण के ज़रिए भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया जिन्होंने चाँद पर कोई यान भेजा हो.

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