तेज़ संगीत पर लगाम कसेगा यूरीपीय संघ

हेडफोन
Image caption मोबाइल पर हेडफोन के ज़रिए संगीत सुनना आम हो गया है

यूरोपीय संघ के अधिकारियों की एक नई योजना से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो रेल या बस में सवार अपने सहयात्रियों द्वारा अपने हेडफोन पर ज़ोर ज़ोर से संगीत सुने जाने की लत से परेशान होते हैं.

यूरोपीय संघ ने सुझाव दिया है कि मोबाइल फ़ोन, आइपोड या म्यूजिक प्लेयर पर हेडफोन के ज़रिये संगीत सुनने की लत पर रोक लगाने का एक तरिक़ा ये हो सकता है कि इन म्यूजिक प्लेयरों में शोर का स्तर सीमित कर दिया जाये, यानी उसका एक डिफौल्ट लेवल तय कर दिया जाए.

हेडफोन पर जोर से संगीत सुनने से न केवल सुनने वाले के आस-पास बैठे लोगों को परेशानी होती है, बल्कि ये स्वयं उसके कानों के लिए भी ख़तरनाक हो सकता है.

ये प्रस्ताव उस शोध के बाद आया है जिसमे पाया गया है कि हेडफोन पर ज़ोर से संगीत सुनने से 10 में से एक व्यक्ति की सुनने की शक्ति हमेशा के लिए चली जाती है.

शोध करने वाले इन वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग पांच वर्ष तक रोज़ एक घंटे से ज़्यादा ऊंची आवाज़ में हेडफोन पर संगीत सुनते हैं उनकी सुनने की शक्ति को हमेशा के लिए नुक़सान हो सकता है.

यूरोपीय संघ ने अभी तक पर्सनल म्यूजिक प्लेयरों के लिए अधिकतम आवाज़ की कोई सीमा तय नहीं की है.

इसके अलावा आइपोड जैसे संगीत के माध्यमों पर भी आवाज़ की कोई सीमा नहीं है. यानि, निर्माता उनमे आवाज़ का स्तर किसी भी सीमा तक तय कर सकते हैं.

नए प्रस्ताव के अर्न्तगत पर्सनल म्यूजिक प्लेयरों और मोबाइल फोनों पर आवाज़ का एक उच्चतम स्तर तय किया जाएगा जिसे डिफौल्ट वोल्यूम कहा जाएगा. म्यूजिक प्लेयर और मोबाइल फ़ोन निर्माता कंपनियों को इस सीमा का पालन करना होगा.

यूरोपीय संघ का कहना है की ये सीमा निर्माताओं पर जबरन नहीं थोपी जायेगी

यूरोपीय संघ की आयुक्त मेग्लीना कुनेवा का कहना है," युवाओं के लिए एक व्यस्त सड़क या फिर रेल या बस में अपने एमपी3 प्लेयर पर आवाज़ के लेवल को खतरनाक स्तर तक ऊंचा कर लेना एक आम बात है."

"इस शोध से हमें ये पता चलता है कि विशेष रूप से युवाओं को इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि वो ज़ोर से संगीत सुन कर अपने सुनने की शक्ति को नुक़सान पंहुचा रहे हैं. कभी कभी तो ये नुक़सान उन्हें वर्षो बाद महसूस होता है और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है."

मेग्लीना कुनेवा ने कहा, "इन नए तकनीकी परिवर्तनों से म्यूजिक प्लेयरों में आवाज़ का स्तर एक सुरक्षित सीमा तक सीमित कर दिया जाएगा, ताकि युवाओं की सुनने की शक्ति को नुकसान न हो. इसके बाद भी जो लोग ऊंची आवाज़ में संगीत सुनना चाहते हैं वो तय सीमा से आगे भी जा सकेंगे लेकिन सीमा लांघने से पहले उन्हें म्यूजिक प्लेयर पर स्पष्ट चेतावनी दी जायेगी ताकि वो ये समझ सकें की वो अपने कानो के लिए खतरा मोल ले रहें हैं."

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