प्रयोगशाला में बनी जबड़े की हड्डी

जबड़े की हड्डी

प्रयोगशाला में स्टेम कोशिकाओं से बनाई गई जबड़े की हड्डी

वैज्ञानिकों ने मानव स्टेम सेल्स या मूल कोशिकाओं से प्रयोगशाला में जबड़े के जोड़ का एक हिस्सा तैयार किया है.

उनका कहना है कि पहली बार एक जटिल हड्डी को इस ढंग से बनाया गया है.

ये आशा की जाती है कि इस तकनीक का इस्तेमाल न केवल किसी जोड़ के विकार का इलाज करने के लिए बल्कि अन्य हड्डियों की समस्याओं को ठीक करने के लिए भी किया जा सकेगा.

न्यूयॉर्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसिस में छपा है.

जोड़ों में कई कारणों से विकार पैदा होते हैं. वो जन्मजात हो सकते हैं गठिया के कारण या फिर चोट लगने से. और इनका इलाज काफ़ी मुश्किल होता है.

जोड़ बड़ी जटिल संरचनाएं होती हैं इसलिए शरीर के किसी अन्य हिस्से से ली गई हड्डी से उनकी मरम्मत करना आसान नहीं होता. लेकिन इस अध्ययन में बोन मैरो से ली गई स्टेम कोशिकाओं का प्रयोग किया गया और रोगी के जबड़े की हड्डी की डिजिटल छवि का इस्तेमाल करके उसी आकार की हड्डी बनाई गई.

भावी संभावनाएं

इस अध्ययन की प्रमुख डॉ गोरदाना वुन्यक नोवाकोविच ने कहा, “रोगी की अपनी स्टेम कोशिकाओं से हड्डी बना पाने से इस तरह के विकारों के इलाज में एक नई क्रांति आ जाएगी”.

डॉ नोवाकोविच ने कहा कि ये नई तकनीक सिर और गर्दन की दूसरी हड्डियों जैसे खोपड़ी और गाल की हड्डियों पर भी इस्तेमाल की जा सकती है जिनकी ग्राफ़्टिंग मुश्किल होती है.

इस तरह मानव हड्डियों के हिस्से बनाने की क्षमता पुनर्संरचना के काम को बिल्कुल बदल डालेगी. विशेषकर किसी गंभीर दुर्घटना में आई चोट के बाद या कैंसर के इलाज में.

हमने सोचा कि जबड़े की हड्डी बनाना हमारी इस नई तकनीक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी. क्योंकि अगर हम ये बना सके तो हम किसी भी आकार की हड्डी तैयार कर सकेंगे.

डॉ गोरदाना वुन्यक नोवाकोविच, अध्ययन की प्रमुख

डॉ नोवाकोविच ने कहा, “हमने सोचा कि जबड़े की हड्डी बनाना हमारी इस नई तकनीक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी. क्योंकि अगर हम ये बना सके तो हम किसी भी आकार की हड्डी तैयार कर सकेंगे”.

उन्होने कहा कि प्रयोगशाला में जो जोड़ तैयार किया गया वह केवल हड्डी थी इसमें अन्य ऊतक जैसे कुरकुरी हड्डी शामिल नहीं थे. हालांकि कोलम्बिया विश्वविद्यालय का दल हड्डी और कुरकुरी हड्डी के मिले जुले रूप को तैयार करने के नए तरीके पर भी काम कर रहे हैं.

इस दिशा में वैज्ञानिकों के लिए एक और चुनौती होगी ऐसी हड्डी तैयार करना जिसमें रक्त की आपूर्ति हो सके और उसे रोगी की रक्त आपूर्ति तन्त्र से जोड़ा जा सके.

इंगलैंड के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में ऊतकों के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर एन्टनी हॉलेन्डर ने पिछले साल एक कृत्रिम श्वासनली बनाने में मदद की थी. उनका कहना है कि इस नई तकनीक का रोगियों में इस्तेमाल अभी दूर है और इस क्षेत्र में बहुत काम करना बाक़ी है.

प्रोफ़ेसर एन्टनी हॉलेन्डर ने कहा, “फिर भी यह ऊतक इंजीनियरिंग की एक अद्भुत मिसाल है जिसने हड्डी को सही आकार में तैयार किया”.

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