'कृषि अनुसंधान में निवेश ज़रूरी'

फ़सल
Image caption बढ़ती आबादी के लिए अगले 40 सालों में कृषि उत्पाद 50 प्रतिशत बढा़ना होगा.

ब्रिटेन को दुनिया की भूख मिटाने के लिए कृषि अनुसंधान में दो अरब पाउंड ख़र्च करने होंगे.

ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी का कहना है कि जिस गति से दुनिया की आबादी बढ़ रही है उसे देखते हुए अगले 40 सालों में कृषि उत्पाद में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की ज़रूरत है.

रॉयल सोसायटी ने इसके लिए जीन संवर्द्धन, सिंचाई की बेहतर तकनीकों और बीमारियों से बचने के लिए फ़सलों को साथ साथ उगाने की व्यवस्था जैसे तरीक़ों पर बल दिया है.

इस साल के शुरु में दुनिया के धनी देशों के संगठन जी आठ ने विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा सुधारने के लिए 20 अरब डॉलर देने का वचन दिया था.

रॉयल सोसायटी की रिपोर्ट का कहना है कि 2050 तक दुनिया की आबादी बढ़कर 9 अरब हो जाएगी और अगर खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना है तो विज्ञान को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी.

हरित क्रांति में 1950 और 1960 के दशकों में धान और मक्का की अधिक पैदावार करने वाले बीज तैयार किए गए थे. जिससे भूख कम हुई और खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ. अब एक नई क्रांति की ज़रूरत है.

रॉयल सोसायटी की इस रिपोर्ट के अध्यक्ष डेविड बॉलकोम्ब ने कहा, "हमें खाद्य उत्पादों की कमी को दूर करने के लिए इस समय क़दम उठाना होगा. अगर हम पांच या दस साल भी इंतज़ार करते रहे तो बहुत देर हो जाएगी".

जीन संवर्द्धित फ़सलों पर मतभेद

जून के महीने में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने कहा था कि इस समय दुनिया में कोई एक अरब लोग भूख का सामना कर रहे हैं. हालांकि इसके लिए बढ़ती बेरोज़गारी और घटती आय भी किसी हद तक ज़िम्मेदार है लेकिन खाद्य आपूर्ति को बढ़ाने के लिए विज्ञान के क्षेत्र में निवेश करना भी ज़रूरी है.

रॉयल सोसायटी का कहना है कि ब्रिटेन को अगले 10 सालों में कृषि अनुसंधान पर हर साल 20 करोड़ पाउंड ख़र्च करना चाहिए.

अल्पकालिक योजनाओं में सिंचाई की तकनीक सुधारना जिससे कम पानी ख़र्च हो, पौधों को पास पास उगाना और खेतों के किनारों पर ऐसे पौधे लगाना शामिल है जो कीट भक्षियों को आकर्षित कर सकें.

लेकिन पौधे उगाने की उन्नत तकनोलॉजी में भी निवेश करने की ज़रूरत है जिसमें जीन संवर्द्धित पौधे भी शामिल हैं.

हालांकि इससे आस पास उगने वाले जंगली पौधों में भी इन जीनों का फैलाव हो सकता है लेकिन सैद्धांतिक रूप से जीन संवर्द्धित फ़सलें बीमारी, सूखे, लवणता, गर्मी और ज़हरीली धातुओं से लड़ने में अधिक सक्षम होती हैं.

एगरिकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल के अध्यक्ष जूलियन लिटल कहते हैं, "दुनिया भर में कोई एक करोड़ 30 लाख किसान जैव तकनोलॉजी और जीन संवर्द्धित तरीकों से फ़सलें उगा रहे हैं और वो भारी उपज का लाभ उठा रहे हैं".

लेकिन पर्यावरण संगठन इसके पक्ष में नहीं हैं. ग्रीनवॉच यूके में काम कर रही शोधकर्ता बैकी प्राइस कहती हैं," बुनियादी बात ये है कि सरकारों ने ग़लत अनुसंधान और विकास में निवेश किया है जो ग़रीब किसानों की ज़रूरतों पर ध्यान देने की बजाय जैव तकनीक पर ध्यान केन्द्रित करता है".

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