नोकिया ने एपल पर मुक़दमा ठोका

आई फ़ोन
Image caption नोकिया का कहना है कि आई फ़ोन के सभी मॉडलों में उसकी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है

दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल फ़ोन निर्माता नोकिया ने कहा है कि वह आईफ़ोन में पेटेंट का उल्लंघन करने के लिए अपने अमरीकी प्रतिद्वंद्वी एपल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है.

नोकिया का आरोप है कि एपल ने आई फ़ोन में उसकी तकनीक का इस्तेमाल किया और इस तकनीक के लिए नोकिया को कोई भुगतान नहीं किया.

उसका आरोप है कि 'नोकिया ने जो तकनीक इजाद की है एपल उसका मुफ़्त में मज़ा लेना चाहता है'.

नोकिया ने एपल पर दस तकनीकी मामलों में पेटेंट के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं, जिसमें वायरलेस डेटा, स्पीच कोडिंग, सेक्युरिटी और इंक्रिप्शन शामिल है.

जैसे ही यह ख़बर बाज़ार में पहुँची कि नोकिया ने एपल पर मुक़दमा कर दिया है, एपल के शेयर की क़ीमतों में गिरावट आई है.

नोकिया का कहना है कि वर्ष 2007 में आई फ़ोन के आने के बाद से हर मॉ़डल में पेटेंट का उल्लंघन किया गया है.

तकनीक का उपयोग

फ़िनलैंड की कंपनी नोकिया का कहना है कि लगभग 40 कंपनियों के साथ उसका समझौता है. इसमें मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली ज़्यादातर कंपनियाँ शामिल हैं. इस समझौते के तहत नोकिया कंपनियों को अपनी तकनीक के इस्तेमाल की अनुमति देती है.

नोकिया का कहना है कि एपल ने ऐसा कोई समझौता नहीं किया है.

कंपनी में बौद्धिक संपदा और क़ानूनी मामलों के वाइस प्रेसीडेंट इलका रानास्तो का कहना है, "मोबाइल उद्योग का मूलभूत नियम है कि कुछ कंपनियाँ तकनीक के विकास के लिए खर्च करती हैं और इस बौद्धिक संपदा के इस्तेमाल के लिए बाक़ी कंपनियों को भुगतान करना पड़ता है."

उनका कहना है, "एपल को भी इस सिद्धांत का पालन करना पड़ेगा."

नोकिया के अधिकारी का कहना है कि पिछले 20 सालों में नोकिया ने 40 अरब यूरो (यानी लगभग 2700 अरब रुपए) अनुसंधान और विकास में खर्च किए हैं.

इसी महीने की शुरुआत में नोकिया ने अपने पहले तिमाही के नतीजों में अपने मोबाइल की गिरती बिक्री की वजह से घाटा दिखाया था.

विश्लेषकों का कहना है कि इस घाटे की एक वजह यह भी रही है कि नोकिया के बहुत से ग्राहक आई फ़ोन या रिम के ब्लैकबेरी की ओर चले गए हैं.

इस बीच एपल ने 1.67 अरब यूरो (यानी कोई 75 अरब रुपए) का फ़ायदा दिखाया है और इसकी वजह आई फ़ोन की बिक्री में सात प्रतिशत की वृद्धि भी एक वजह रही है.

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