ब्रिटेन पहुंचा भारतीय टिड्डा

भारतीय टिड्डा
Image caption भारत से चल कर ब्रिटन पहुंचा टिड्डा

ब्रिटेन के स्टैनस्टैड हवाई अड्डे पर भारत से चला एक ऐसा टिड्डा पहली बार आ पहुँचा है, जो ब्रिटन में पहले कभी नहीं देखा गया.

‘पौएक्लोसेरस पिक्टस’ कहा जाने वाला ये रंग बिरंगा टिड्डा भारत से आई एक उड़ान के ज़रिए ब्रिटेन के स्टैनस्टैड हवाई अड्डे तक पहुँचा है.

छह सेंटीमीटर लंबे इस टिड्डे के चमकीले नीले और पीले रंग, अपने शिकारी को पहले ही चेतावनी दे देते हैं कि वो खाने में उतना स्वादिष्ट नहीं होंगे. ये और बात है कि वो भारत और पाकिस्तान जैसे दक्षिण एशियाई देशों में अपने पूरे दल के साथ फ़सलों को सफाचट कर जाता है.

ब्रिटेन के खाद्य एवं पर्यावरण संस्थान यानी फ़ेरा ने इस कीट को पहचाना है.

फ़ेरा के कीटविज्ञानी क्रिस मैलंफ़ी ने कहा, “ये सैलानी टिड्डा इतना पेटू है कि जब इसे अलग ले जाकर प्रयोगशाला में रखा गया तो इसने बंदगोभी पर ऐसा हमला बोला कि उसे खाते हुए बंदगोभी के अंदर पहुंच गया.”

क्रिस मैलंफ़ी का ये भी कहना था कि इस टिड्डे की खाने की क्षमता और रफ्तार मवेशियों से कहीं तेज़ है, “ये टिड्डे वज़न के आधार पर अपने से कहीं भारी आम पशुओं के मुकाबले आठ गुना ज्यादा तेज़ रफ्तार से हरा चारा खा सकते हैं. ”

फ़ेरा का ये कहना है कि अनजाने में कीट और पशुओं का दूसरे देशों में पहुंच जाना अस्वाभाविक तो नहीं है, लेकिन अचानक या बिना किसी जानकारी के किसी कीट का किसी देश में पहुंच कर वहाँ के स्थानीय पर्यावरण में आज़ादी से घूमना स्थानीय फसलों के लिए काफी ख़तरनाक हो सकता है.

क्रिस मैलंफ़ी का कहना है, “भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में ये टिड्डी दल कई तरह की फसलों, जैसे बैंगन, खट्टे फलों, आलू, टमाटर आदि की फसल पर हमला बोल कर भारी आर्थिक नुक़सान पहुंचाते हैं.”

लेकिन फ़ेरा के मुताबिक़ ब्रिटेन पहुंचा ये सैलानी टिड्डा एक तो यहाँ अपनी आबादी नहीं बढ़ा पाएगा, दूसरे ब्रिटेन की सर्दी में इस टिड्डे के जीवित रहन पाने की संभावना भी नहीं के बराबर है, इसलिए ब्रिटेन की फसलों को सफ़ाचट करने की इसकी तमन्ना पूरी नहीं हो पाएगी.

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