2010 हो सकता है सबसे गर्म

जलवायु परिवर्तन

ब्रितानी मौसम विभाग का कहना है कि अगले वर्ष यानी 2010 में औसत वैश्विक तापमान नई ऊंचाई तक पहुँच सकता है.

उनका कहना है कि मानव जनित कारणों और अल-नीनो के प्रभाव की वजह से ऐसा हो सकता है.

कोपेनहेगन में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में यह नया शोध प्रस्तुत किया गया है.

अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार 1998 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है.

लेकिन ब्रितानी मौसम वैज्ञानिक जो भविष्यवाणी कर रहे हैं उसके अनुसार वर्ष 2010 इस रिकॉर्ड को तोड़ सकता है.

उनका कहना है कि औसत तापमान 0.6 डिग्री तक बढ़ सकता है.

अल-नीनो भी वजह

वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो तापमान की वृद्धि में अहम भूमिका अदा करेगा.

अल-नीनो एक मौसम संबंधी परिस्थिति है जिसके प्रभाव से प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ रहा है और वैज्ञानिकों को विश्वास है कि वर्ष 2010 में अवश्य ही 1860 से अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया जाएगा.

वैसे मौसम विभाग ने ऐहतियात के तौर पर यह भी कहा है कि यदि अल-नीनो एकाएक धीमा पड़ गया या फिर कोई बड़ा ज्वालामुखी फट पड़ा तभी यह हो सकता है कि वर्ष 2010 सबसे गर्म साबित न हो.

ब्रितानी मौसम विभाग में जलवायु परिवर्तन की मुख्य परामर्थदात्री डॉ विकी पोप का कहना है कि वर्ष 2010 को 1998 की तुलना में अधिक गर्म बनाने के लिए मानवीय गतिविधियाँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगीं.

एक दिलचस्प बात और है कि जहाँ वर्ष 2010 के सबसे गर्म वर्ष होने की बात कही जा रही है यह दुनिया भर में सबसे अधिक भीगा हुआ या सबसे अधिक बारिश वाला वर्ष भी हो सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी से ज़्यादा आर्द्रता पैदा होगी और इसके फलस्वरुप अधिक बारिश भी होगी.

उनका यह भी कहना है कि अगले दस वर्षों में से लगभग आधा हिस्सा अब तक के रिकॉर्ड से अधिक गर्म साबित होगा.

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