कैंसर से जुड़ा नया परीक्षण

अमरीका में शोधकर्ताओं ने कैसंर से जुड़ी नई पद्दति विकसित की है. इसमें ख़ून के परिक्षण के ज़रिए पता लगाया जा सकता है कि क्या कैंसर का इलाज ठीक से हो रहा या ठीक होने के बाद मरीज़ को फिर से कैंसर तो नहीं हो गया.

इस परीक्षण में ट्मूयर डीएनए के नए ढाँचे की पहचान हो सकती है जो हर मरीज़ में अलग-अलग होता है.

इस आनुवंशिकी फ़िंगरप्रिंट का इस्तेमाल ट्यूमर के अवशेष पता लगाने में किया जा सकता है. ये तकनीक अभी काफ़ी महंगी है लेकिन क़ीमत लगातार कम हो रही है.

शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस तकनीक का इस्तेमाल ये जानने में किया जा सकेगा कि क्या मरीज़ को फिर से कैंसर तो नहीं हो गया. यानी स्कैन कराने से पहले ही डॉक्टर ये जानकारी हासिल कर पाएँगे.

इस तकनीक के विकास के लिए कुछ मरीज़ों का डीएनए लिया गया था. मरीज़ों के टि्शू या ऊतकों के छह सेट लिए गए थे जिसमें सामान्य और कैंसर वाले टि्शू दोनों शामिल थे.

परीक्षण पर अभी और शोध करने की ज़रूरत है ताकि सही-सही नतीजें मिल सकें.

शोधकर्ताओं के प्रमुख डॉक्टर विक्टर उम्मीद जताते हैं कि पांच साल के अंदर ये तकनीक व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होने लगेगी.

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