फिर चलने को तैयार महामशीन

Image caption इन्हीं पाइपों में दौड़ाया जाता है प्रोटॉन कणों को

ब्रह्मांड के अबूझ रहस्यों को समझने के लिए बनाई गई महामशीन लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर(एलएचसी) को अगले सप्ताह दोबारा चालू किया जाएगा.

स्विटजरलैंड स्थित प्रयोगशाल सर्न के बयान में कहा गया है कि सोमवार के बाद किसी भी दिन एलएचसी को चालू किया जा सकता है.

कुछ दिनों तक चलाए जाने के बाद इसे क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान बंद किया गया था. सर्न के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि महामशीन को तकनीकी रखरखाव के लिए बंद किया गया था.

बंद किए जाने से पहले हैड्रॉन कोलाइडर को कम क्षमता पर चलाया गया था, लेकिन तब भी इसने पदार्थ कणों की अधिकतम ऊर्जा का रिकॉर्ड बना डाला.

ये रिकॉर्ड 2.36 टीईवी या ट्रिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट का था.

सर्न के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले हफ़्ते एक बार फिर महामशीन को कम ऊर्जा स्तर पर चालू किया जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे इसमें पदार्थ कणों की ऊर्जा बढ़ाई जाती रहेगी. लक्ष्य 7 टीईवी का ऊर्जा स्तर हासिल करने का है.

महत्वपूर्ण प्रयोग

सर्न का लार्ड हैड्रॉन कोलाइडर स्विट्ज़रलैंड और फ़्रांस की सीमा पर ज़मीन के नीचे बिठाया गया है.

इसमें 27 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन जैसा एक ढांचा है जिसमें लगभग प्रकाश की गति से अणुओं और सूक्ष्म आण्विक कणों को दौड़ाया जाता है. इसमें होने वाले कई तरह के प्रयोगों में भारी ऊर्जा की अवस्था में इन मूल कणों की परस्पर टक्कर का प्रयोग भी शामिल है.

वैज्ञानिकों के अनुसार इस महाटक्कर से उसी तरह की परिस्थितियाँ पैदा होनी चाहिए जैसी ब्राह्मांड के निर्माण के दौरान रही होंगी. महाटक्कर के दौरान कई नए मूलकणों की उत्पत्ति की भी संभावना है, जो कि अंतत: भौतिकी के अबूझ पहेलियों को सुलझाने में सहायक साबित होंगे.

सर्न की इस परियोजना से भारत समेत अनेक देशों के सैंकड़ो वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं. महामशीन के प्रयोगों से मिलने वाले आंकड़ों के अध्ययन के लिए अत्यंत ताक़तवर सुपरकंप्यूटरों को बरसों तक काम पर लगाना पड़ेगा.

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