डायनासोरों को खा जाने वाला साँप

अजगर और डायनासोर की एक कलाकृति
Image caption यह साँप केवल डायनासोर के बच्चो की ही खाता था

क्या कोई साँप किसी डायनासोर का शिकार कर सकता है, इसका जवाब होगा, हाँ.

वैज्ञानिकों को मिले साँप के एक जीवाश्म से पता चला है कि डायनासोरों के काल में भी साँप पाए जाते थे.

भारतीय शहर अहमदाबाद से 130 किमी दूर धोली डुंगरी गाँव से वैज्ञानिकों ने साँप, डायनासोर और उसके अंडों के जीवाश्म खोज निकाले हैं.

सह अस्तित्व

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन अवशेषों और जीवाश्मों से ये साफ़ पता चलता है कि क़रीब 6.7 करोड़ साल पहले एक विशेष प्रजाति के साँप और डायनासोर साथ-साथ रहते थे.

ये साँप बड़े डायनासोरों को नहीं बल्कि उनके अंडों से निकले बच्चों को खाते थे. वे बच्चों के ऊपर कुंडली मार लेते थे और उन्हें मारकर निगल जाते थे.

साँप और डायनासोर के इन अवशेष और जीवाश्मों को खोजा है भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के वैज्ञानिक डॉक्टर धनंजय मोहाबे ने.

डॉक्टर धनंजय कहते हैं, ''समय के गर्भ में छिपे इस पल को खोजना बहुत रोमांचक था.''

मिशिगन विश्वविद्यालय और टोरंटो के मिसिसॉगा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने इसका अध्ययन और पुष्टि की है.

यह अध्ययन पीएलओएस (पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ़ साइंस) बॉयोलाजी जर्नल के दो मार्च के इंटरनेट संस्करण में प्रकाशित हुआ है.

भारत में पाए जाने वाले अजगर जैसा ये साँप जो डायनासोर का शिकार कर लेता था, इसे नाम दिया गया है, सनाजेह इंडिकस.

अध्ययन के मुताबिक़ ये प्राचीन साँपों के खाने की आदतों के बारे में पहला प्रत्यक्ष प्रमाण है.

जिस साँप का जीवाश्म मिला है, वह साढ़े तीन मीटर लंबा है और डायनासोर के एक बच्चे के चारों ओर लिपटा हुआ है.

एक व्यस्क शाकाहारी डायनासोर का वजन क़रीब सौ टन होता था.

डरपोक डायनासोर

बहुत से लोग साँप से डरते हैं लेकिन इस शोध से पता चलता है कि विशालकाय डायनासोर भी साँपों से डरते थे.

Image caption ये जीवाश्म अहमदाबाद के पास एक गाँव में 1987 में खोज निकाले गए थे

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन सांपों के जीवाश्म में आधुनिक साँपों की तरह गतिशील जबड़े नहीं हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि इसे डायनासोर के अंडों को खाने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती होगी.

जीवाश्म को 1987 में खोजा गया था. लेकिन इसे तब तक मान्यता नहीं मिली जब तक अमरीकी वैज्ञानिकों ने ये नहीं कह दिया कि डायनासोर के अंडों के बीच एक साँप भी था.

शोधकर्ताओं का मानना है कि साँप ने हमला तब किया होगा जब अंडों से छोटे डायनासोर निकले होंगे.

आज जो प्रमाण मिले हैं वे तूफ़ान जैसे किसी प्राकृतिक आपदा के कारण बने होंगे, इससे यह पूरा परिदृश्य समय की परतों में जम गया होगा.

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