इंटरनेट ने बदले मनोरंजन के मायने

साभार: यू ट्यूब

रण जैसी कई हाल में रिलीज़ हुई फ़िल्में आप यू ट्यूब पर देख सकते हैं

आप दुनिया के किसी भी हिस्से में जाएं सिनेमा ऐसा नशा है जिसका जादू सर चढ़कर बोलता है. इंटरनेट यानी तारों का जाल और इस जाल से मनोरंजन की दुनिया भी बच नहीं पाई हैं. फ़िल्म और संगीत के रिलीज़ से लेकर उसके प्रदर्शन और प्रचार तक के कई पहलूओं को इंटरनेट ने बदल कर रख दिया है.

यहाँ तक कि यू ट्यूब से लोगों को हॉलीवुड-बॉलीवुड में ब्रेक मिल रहा है. इंटरनेट विज्ञापनों की भी नई दुनिया बन गई है.

आजकल तो फ़िल्म रिलीज़ हुई नहीं कि लोग उसकी प्राइरेटिड कॉपी तुरंत ही अवैध तरीके से इंटरनेट के ज़रिए यू ट्यूब पर डाल देते हैं और घर पर बैठे-बैठे ही फ़िल्म देख लेते हैं-फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो.

पा जिस दिन रिलीज़ हुई उसी दिन किसी ने ये फ़िल्म यू ट्यूब पर डाल दी. हमने यू ट्यूब को कई नोटिस भेजे. वे फ़िल्म इंटरनेट से हटा देते थे लेकिन तुरंत कोई फ़िल्म दोबारा अपलोड कर देता था. मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए

अमिताभ बच्चन

फ़िल्म पा के रिलीज़ के दिन हिंदी फ़िल्मों के शंहशाह अमिताभ बच्चन के साथ क्या हुआ वे ख़ुद बताते हैं, "पा जिस दिन रिलीज़ हुई उसी दिन किसी ने ये फ़िल्म यू ट्यूब पर डाल दी. हमने यू ट्यूब को कई नोटिस भेजे. वे फ़िल्म इंटरनेट से हटा देते थे लेकिन तुरंत कोई फ़िल्म दोबारा अपलोड कर देता था. मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए."

यहाँ मानो अमिताभ भी कहते नज़र आए कि इंटरनेट के जाल से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमिकन सा है.

वेबसाइट पर देखिए फ़िल्में और सिरीयल

इंटरनेट तो मानो अब ऐसा पिटारा बन गया हैं जहाँ आप जो चाहें जब चाहें देख सकते हैं.इसी बाज़ार का फ़ायदा उठाने के लिए कई कंपनियों ने अपनी-अपनी बेबसाइटें खोली हैं.

इरोस इंटरनेशनल मनोरंजन की दुनिया में बड़ा नाम है और इरोस की वेबसाइट लोगों को ऑन डिमांड वीडियो उपलब्ध कराती है. इरोस के मनु कौशिश बताते हैं, "इंटरनेट के आने से लोगों के पास कॉन्टेंट की पहुँच का तरीका बदल गया है. लोग चाहते हैं कि अपनी मर्ज़ी के मुताबिक, अपनी सुविधा के अनुसार फ़िल्म या वीडियो देखें. इरोस ने उन्हें एक प्लेटफ़ॉर्म दिया है कि लोग चाहेदुनिया के किसी भी हिस्से में हो- वे हमारी वेबसाइट पर जाएँ, ब्राउज़ करें और अपनी मर्ज़ी की फ़िल्में देखें. रेवेन्यू कई तरीकों से आता है. कई फ़िल्मों में विज्ञापन आते हैं. कुछ फ़िल्मों को आप पैसे देकर डाउनलोग कर सकते हैं."

मैने प्यार किया और हम आपके हैं कौन जैसी सुपरहिट फ़िल्में बनाने वाले राजश्री बैनर ने भी अब इस दिशा में क़दम बढ़ाएँ हैं और राजश्री डॉट कॉम खोला है.

इतने बड़े बैनर ने आख़िरकर क्या सोचकर इंटरनेट और ऑनलाइन की दुनिया में क़दम रखा.

इंटरनेट के आने से लोगों के पास कॉन्टेंट की पहुँच का तरीका बदल गया है. लोग चाहते हैं कि अपनी मर्ज़ी के मुताबिक, अपनी सुविधा के अनुसार फ़िल्म या वीडियो देखें. इरोस ने उन्हें एक प्लेटफ़ॉर्म दिया है कि लोग चाहेदुनिया के किसी भी हिस्से में हो- वे हमारी वेबसाइट पर जाएँ, ब्राउज़ करें और अपनी मर्ज़ी की फ़िल्में देखें. रेवेन्यू कई तरीकों से आता है. कई फ़िल्मों में विज्ञापन आते हैं. कुछ फ़िल्मों को आप पैसे देकर डाउनलोग कर सकते हैं

मनु कौशिश, इरोस

राजश्री मीडिया के मैनेजिंग डाइरेक्टर और सीईओ रजत बड़जात्या कहते हैं," हमने देखा कि कई फ़िल्में लोग अवैध तरीके से इंटरनेट पर डाल रहे थे, पाइरेसी हो रही थी और लोग देख भी रहे थे. तभी हमने सोचा कि क्यों न हम ख़ुद ये काम करें ताकि लोग लीगल या वैध तरीके से ये फ़िल्में देख पाएँ. बहुत सारी फ़िल्में मुफ़्त में देख सकते हैं. अगर कोई इसे डाउनलोड करना चाहता है तो वो उसे चंद डॉलर की फ़ीस देकर डाउनलोड भी कर सकता है.

रजत बड़जात्या बताते हैं कि कुछ साल पहले राजश्री की फ़िल्म विवाह इंटरनेट पर रिलीज़ की गई थी जिसकी काफ़ी अच्छी प्रतिक्रिया मिली. इसके बाद राजश्री ने ज़ी, स्टार, यू ट्यूब वगैरह से पार्टरनशिप की जो धारावाहिक भी उनकी वेबसाइट पर डालते हैं. यहाँ तक कि बीबीसी मोशन गैलरी से कुछ वीडियो और रिपोर्टें भी इस बेवसाइट पर हैं जो कहीं- कहीं ही देखने को मिलती है.

वे कहते हैं, "राजश्री की वेबसाइट खोलने का दूसरा कारण है कि आने वाले कल में लैपटॉप,आईपॉड जैसे उपकरण लोगों के हाथों में जा रहे हैं. इंटरनेट के ज़रिए इन्हीं पर लोग फ़िल्में देखेंगे. तो हमने डिजिटल वेंचर खोला और यू ट्यूब पर हमारे 11 चैनल हैं अलग-अलग भाषाओं में."

इरोस इंटरनेशनल ने भी ऐसी ही वेबसाइट शुरु की हुई है.यकीन मानिए ऐसी वेबसाइटें किसी भी फ़िल्म प्रेमी के लिए किसी खज़ाने से कम नहीं.देवदास शाहरुख से लेकर दादा मुनी अशोक कुमार तक की फ़िल्में, सिरीयल आप यहाँ देख सकते हैं.

आप सोचेंगे कि इससे इन वेबसाइटों को क्या फ़ायदा.रजत बड़जात्या बताते हैं, "मुनाफ़ा हमें विज्ञापनों से मिलता है जो इंटरनेट पर कंपनियाँ हमारी वेबसाइट पर डालती हैं. फिर फ़िल्में आदि डाउनलोड करने के लिए लोग फ़ीस देते हैं. उससे भी आमदनी होती है. तीसरा ज़रिया है कि हमारा यूट्यूब, अमेज़ॉन वगैरह से अनुबंध है जो हमारे फ़िल्में, सिरीयल लेते हैं. यू ट्यूब पर हमारे 21.5 करोड़ वीडियो डाले."
हुए हैं.

यू ट्यूब से मिली हॉलीवुड फ़िल्म

  • वेबसाइटों पर देखिए फ़िल्में और सिरीयल
  • थिएटरों के साथ-साथ यू ट्यूब पर रिलीज़ हो रही हैं फ़िल्में
  • यू ट्यूब के माध्यम से मिल रहे हैं हॉलीवुड के ऑफ़र
  • सीडी के बजाय ऑनलाइन रिलीज़ हो रहे हैं एलबम
  • फ़ेसबुक-ऑरकुट के ज़रिए मिल रहा है फ़िल्मों में काम
  • ब्लॉग और वेबसाइट के ज़रिए फ़िल्मों का प्रचार

इंटरनेट ने फ़िल्म रिलीज़ करने का तरीका भी बदल दिया है. रंग दे बसंती से मशहूर हुए अभिनेता सिद्धार्थ की हिंदी फ़िल्म स्ट्राइकर पिछले महीने थिएटरों के साथ-साथ पूरी दुनिया में एक साथ इंटरनेट पर रिलीज़ हुई (भारत को छोड़कर).

जब भारत में लोग इंटरवल के दौरान पॉपकॉर्न खरीद रहे थे तो उसी दौरान हीरो साहब ऑनलाइन थे और दुनिया भर के उन फ़ैन्स के साथ चैट कर रहे थे जो फ़िल्म को रिलीज़ के दिन विभिन्न देशों में ऑनलाइन देख रहे थे.और ये इंटरनेट का ही कमाल था.

इंटरनेट ने दुनिया के सामने अपनी सृजनशीलता दिखाने के भी नए दरवाज़े खोल दिए हैं. ज़रा इस किस्से पर ग़ौर कीजिए. उरुग्वे के एक निर्माता फ़ेडे अल्वारोज़ ने पिछले साल नवंबर में करीब पाँच मिनट की एक लघु फ़िल्म बना यू ट्यूब पर अपलोड की. और चंद दिन बाद उन्हें हॉलीवुड के लिए फ़िल्म बनाने का प्रस्ताव मिल गया.

बीबीबी से बातचीत में अल्वरारोज़ बताते हैं, "मेरी इस हॉलीवुड फ़िल्म को प्रायोजित करेंगे सैम राइमी जो स्पाइरमैन और एवल डेड जैसी फ़िल्में बान चुके हैं. ये अदभुत था, हम सब चकित थे.अगर कोई निर्देशक यू ट्यूब पर इंटरनेट के ज़रिए फ़िल्म डालकर हॉलीवुड की फ़िल्म हासिल कर सकता है तो फिर ये किसी के लिए भी मुमकिन है."

वहीं नई अभिनेत्री और शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा को तीन पत्ती में अपना पहला रोल इंटरनेट के ज़रिए ही मिला.निर्माता ने उनकी तस्वीरें फ़ेसबुक पर देखीं और बुला लिया ऑडिशन के लिए.

संगीत और इंटरनेट

जब आप सीडी रिलीज़ करते हैं तो उसमें रिकॉर्ड कंपनियाँ शामिल हो जाती हैं. लेकिन गायक को पूरा फ़ायदा नहीं मिलता. वो सोचता रह जाता है कि एलबम की बिक्री तो अच्छी है फिर मुझे पैसे क्यों नहीं दे रहे. आपको हिसाब माँगना पड़ता है. ये कलाकार की फ़ितरत नहीं है कि वो हिसाब माँगे. इसिलए मैने इस बार एलबम ऑनलाइन रिलीज़ की

लकी अली

संगीत के क्षेत्र में भी इंटरनेट के कारण नए प्रयोग हो रहे हैं. गायक लकी अली ने अपनी ताज़ा एल्बम सीडी के ज़रिए नहीं बल्कि ऑनलाइन बाज़ार में रिलीज़ की है. क्यों, ख़ुद लकी बताते हैं, "दरअसल जब आप सीडी रिलीज़ करते हैं तो उसमें रिकॉर्ड कंपनियाँ शामिल हो जाती हैं. लेकिन गायक को पूरा फ़ायदा नहीं मिलता. वो सोचता रह जाता है कि एलबम की बिक्री तो अच्छी है फिर मुझे पैसे क्यों नहीं दे रहे. आपको सिस्टम से लड़ना पड़ता है, हिसाब माँगना पड़ता है. ये कलाकार की फ़ितरत नहीं है कि वो हिसाब माँगे. मैं नाम नहीं लूँगा पर मेरा अनुभव कंपनियों के साथ अच्छा नही रहा. इसिलए मैने इस बार एलबम ऑनलाइन रिलीज़ की."

इस माया जाल का एक बड़ा नुकसान ये ज़रूर है कि इंटरनेट पर बिना क़ानूनी अधिकार के लोग अवैध रूप से दूसरों की फ़िल्में,गाने और दूसरी चीज़ें डाउनलोड करते हैं.लेकिन हर सिक्के के दो पहलू तो होते ही हैं.

राजश्री के रजत बड़जात्या कहते हैं कि जल्द ही तारों का ये जाल इतना फैल जाएगा कि लोग अपने कंप्यूटर पर ही नहीं अपने मोबाइल, टीवी और यहां तक की घड़ियों जैसे उपकरणों पर भी इंटरनेट के ज़रिए फ़िल्में देख पाएँगे.

अपनी बात समेटते हुए वे बड़े आत्मविश्वास से कहते हैं कि मनोरंजन जगत में भविष्य का माध्यम इंटरनेट ही है और इस क्षेत्र में बहुत कुछ नया होना अभी बाकी है. यानी पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त.


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