सेक्स सक्रियता में पुरुष आगे

Image caption अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है बुढ़ापे में काम-सक्रियता का मामला

अमरीका में हुए एक सर्वे के अनुसार सेक्स-लाइफ़ के मामले में महिलाओं के मुक़ाबले पुरुष बहुत आगे होते हैं.

अध्ययन में पाया गया कि उम्र के 55 वें साल के पड़ाव को यदि आधार माना जाए तो एक पुरुष अगले 15 साल तक काम क्रिया में सक्रिय रहने की उम्मीद कर सकता है, जबकि किसी महिला के लिए ये समय-सीमा साढ़े 10 साल की होगी.

उम्र बढ़ने के साथ ये अंतर और बढ़ता जाता है. उदाहरण के लिए यदि 75 से 85 साल उम्र के लोगों की बात करें तो इस वर्ग में जहाँ 38.9 प्रतिशत पुरुषों ने यौन सक्रियता की बात की, वहीं महिलाओं में से मात्र 16.8 प्रतिशत ने ही ये स्वीकारोक्ति की.

इस अध्ययन में क़रीब 6000 लोग शामिल थे. पूरी रिपोर्ट प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी है.

शिकागो विश्वविद्यालय की विशेषज्ञों स्टैसी टेसलर लिन्डाउ और नतालिया गैवरिलोवा ने कहा कि इस अध्ययन पर इस तथ्य का असर हो सकता है कि इसमें शामिल 25 से 54 वर्ष वर्ग के तीन चौथाई पुरुषों के साथ पार्टनर थे, जबकि महिलाओं में से मात्र दो तिहाई के मामले में ही ये बात लागू होती थी.

साइकिल की सवारी से तुलना

इस अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्स-लाइफ़ का सीधा संबंध अच्छे स्वास्थ्य से है. अच्छा स्वास्थ्य न सिर्फ़ कामक्रीड़ा के लिए व्यक्ति को प्रेरित करता है बल्कि इसमें ज़्यादा आनंद भी संभव बनाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति किसी बीमार व्यक्ति के मुक़ाबले सेक्स में दुगुनी दिलचस्पी लेगा. स्वस्थ व्यक्ति के नियमित रूप से कामक्रिया में शामिल होने और फलस्वरूप आनंद का अनुभव करने की संभावना होती है.

टेक्सस एएंडएम विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर पैट्रिशिया गुडसन ने अध्ययन के परिणामों पर अपनी टिप्पणी में सवाल किया कि आख़िर सेक्स के मामले में पुरुषों से पीछे छूट जाने के बाद भी बुजुर्ग महिलाएँ इसे एक समस्या के रूप में क्यों नहीं देखती हैं.

उन्होंने कहा कि अध्ययन से ये भी पता नहीं चल पाता है कि बुढ़ापे में भी कामक्रिया में सक्रिय लोग अपनी सेक्स-लाइफ़ को कैसे संभालते हैं.

गैरसरकारी संस्था रिलेट की सलाहकार पाउला हॉल कहती हैं, "उम्र के साथ काम सक्रियता घटती जाती है. लेकिन शारीरिक रूप से कोई दंपती स्वस्थ है तो कोई कारण नहीं कि वो काम क्रिया का आनंद नहीं उठाए."

पाउला ने आगे कहा, "कामक्रिया से पीछे हटने की तुलना साइकिल की सवारी छोड़ने से की जा सकती है- या तो आप साइकिल पर चढ़ नहीं पाते हैं, या फिर आपके पास साइकिल ही नहीं है."

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