गंजापन इतना भी बुरा नहीं

Image caption बाल झड़ने का पुरुष हॉर्मोन से रिश्ता है

उम्र बढ़ते जाने के साथ किसी के सिर के बाल कम हो रहे हों तो भारत में ऐसे व्यक्ति के साथ मज़ाक किया जाता है कि गंजापन उसकी बढ़ती संपन्नता की निशानी है.

इस बात में कोई सच्चाई हो या नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया है कि युवावस्था में शुरू हो जाने वाला गंजापन स्वास्थ्य की दृष्टि से कम-से-कम एक अच्छा संदेश देता है.

अमरीका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने पाया कि तीसेक साल की उम्र में गंजेपन की चपेट में आने वाले पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर होने का ख़तरा बहुत कम होता है.

ये अध्ययन कैंसर एपिडेमियोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

शोधकर्ताओं ने 2000 पुरुषों पर अध्ययन किया जिनमें से आधे प्रोस्टेट कैंसर के मरीज़ थे.

कम उम्र में गंजेपन का संबंध बालों के मूल में डिहाइड्रो-टेस्टोस्ट्रोन की मात्रा बढ़ने से है. यह रसायन पुरुष हार्मोन टेस्टोस्ट्रोन से बनता है.

इसलिए वैज्ञानिकों ने ये निष्कर्ष निकाला है कि युवावस्था में टेस्टोस्ट्रोन का बढ़ा स्तर प्रोस्टेट या पौरुष ग्रंथि के कैंसर को रोकता है.

हालाँकि इससे पहले के कुछ अध्ययनों में इससे ठीक उलट परिणाम सामने आया था.

इतना ही नहीं प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों को टेस्टोस्ट्रोन कम करने वाली दवा भी दी जाती है ताकि कैंसर ट्यूमर के बढ़ने की रफ़्तार को रोका जा सके.

बालों के झड़ने के कई और कारण हो सकते हैं जिनमें आनुवांशिक संरचना सबसे प्रमुख है, वैज्ञानिकों ने टेस्टोस्ट्रोन की गतिविधियों के अध्ययन के आधार पर यह बात कही है लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से पक्के तौर पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी.

प्रोस्टेट कैंसर की विशेषज्ञ डॉक्टर हेलेन रिपन कहती हैं, "इस शोध से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि टेस्टोस्ट्रोन पुरुषों के शरीर में किस तरह काम करता है".

कैंसर रिसर्च यूके की डॉक्टर एलिसन रॉस कहती हैं कि प्रोस्टेट कैंसर और गंजेपन का रिश्ता हो सकता है लेकिन उसके बारे में बहुत जानकारी उपलब्ध नहीं है.

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