लकड़बग्घे की हँसी का राज़

लकड़बग्घों की खिलखिलाहट बहुत ख़तरनाक होती है

लकड़बग्घों की खिलखिलाहट बहुत ख़तरनाक होती है

वैसे तो भेड़ियों और लकड़बग्घों की हँसी या खिलखिलाहट किसी भी इंसान की रूह को हिलाने की ताक़त रखती है मगर अब वैज्ञानिकों का कहना है कि लकड़बग्घे जब खिलखिलाते हैं तो उसमें उनकी हैसियत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ छुपी होती हैं.

ताज़ा अध्ययन में पाया गया है कि लकड़बग्घे की खिलखिलाहट की पिच से उसकी उम्र का पता चलता है और खिलखिलाहट में आने वाले उतार-चढ़ाव से उनकी सामाजिक हैसियत यानी रुतबे की जानकारी मिलती है कि उनके समूह में उनका कितना रौबदाब है.

अमरीका में लकड़बग्घों की हँसी और खिलखिलाहट पर किए गए इस शोध की रिपोर्ट बीएमसी इकॉलोजी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है.

यह अध्ययन अमरीका के बर्किली स्थित कैलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर फ्रेडरिक थ्यूनिसेन और प्रांस के सेंट एटीन स्थित यूनिवर्सिटी ज़्याक मोने के प्रोफ़ेसर निकोला मैथेवॉन ने किया है.

इन दोनों प्रोफ़ेसरों ने अपने अध्ययन दल के साथ 26 लकड़बग्घों की हँसी और खिलखिलाहट का अध्ययन किया जिन्हें बर्किली में एक केत में पकड़कर रखा गया था. इनमें कुछ धब्बों वाले लकड़बग्घे भी थे.

किसी लकड़बग्घे की खिलखिलाहट सामने वाले लकड़बग्घे को सामाजिक हैसियत का अंदाज़ा देती है. इससे लकड़बग्घों को अपने भोजन अधिकार स्थापित करने और भोजन से संबंधित गतिविधियोंमें तालमेल बनाने में मदद मिलती है.

प्रोफ़ेसर थियूनिसेन

प्रयोग के दौरान इन लकड़बग्घों की विभिन्न परिस्थितियों के दौरान हँसी और खिलखिलाहट को रिकॉर्ड किया गया यानी वो अलग-अलग हालात में किस तरह से आवाज़ें निकालते थे.

मसलन जब लकड़बग्घों को खाना दिया जाता था तो वो एक दूसरे के साथ किस तरह से पेश आते थे. अलग-अलग हालात में उनकी प्रतिक्रिया अलग-अलग होती थी और उनकी हँसी और खिलखिलाहट भी अलग-अलग होती थी.

इस अध्ययन दल ने लकड़बग्घों की हँसी और खिलखिलाहट के बारे में गत वर्ष कुछ अस्थाई परिणाम प्रकाशित किए थे.

अब जो नतीजे प्रकाशित किए गए हैं उनमें यह पुष्टि की गई है कि लकड़बग्घे की आवाज़ हँसी या खिलखिलाहट की पिच से उसकी उम्र के बारे पता चलता है जबकि खिलखिलाहट में उतार-चढ़ाव उसके सामाजिक दर्जे के बारे में जानकारी मिलती है यानी उसके समूह में उसकी सामाजिक हैसियत रौबदाब वाली है या दूसरे या फिर तीसरे दर्जे की.

अगर कोई लकड़बग्घा किसी समूह में नया-नया शामिल होता है तो उसका दर्जा सबसे नीचे होता है जो उसकी खिलखिलाहट से पता चलता है.

प्रोफ़ेसर थियूनिसेन का कहना था, "किसी लकड़बग्घे की खिलखिलाहट सामने वाले लकड़बग्घे को सामाजिक हैसियत का अंदाज़ा देती है. इससे लकड़बग्घों को अपने भोजन अधिकार स्थापित करने और भोजन से संबंधित गतिविधियोंमें तालमेल बनाने में मदद मिलती है."

मादा का रुतबा

धब्बों वाले लकड़बग्घे मुख्य रूप से निशाचर यानी रात को जागने वाले होते हैं और वो आमतौर पर समूहों में रहते हैं जिनके सदस्यों की संख्या दस से लेकर 90 तक हो सकती है.

लकड़बग्घा

लकड़बग्घों की खिलखिलाहट आदमी की रूह हिला सकती है

ये लकड़बग्घे आमतौर पर कोई शिकार सामूहिक रूप से करते हैं लेकिन कभी-कभी कोई शिकार उनमें हिंसक प्रतियोगिता भी पैदा कर देता है क्योंकि शिकार जब हाथ लग जाता है तो उसमें हिस्सा पाने के लिए लकड़बग्घों में अक्सर ख़ूनी लड़ाई भी हो जाती है.

धब्बों वाले लकड़बग्घों में आमतौर पर मादा का रौब चलता है और उन्हें अन्य नर लकड़बग्घों के मुक़ाबले ऊँचा सामाजिक दर्जा हासिल होता है, और इसमें उम्र कहीं भी आड़े नहीं आती है.

शोध दल का कहना है कि लकड़बग्घों की इस सामाजिक हैसियत का संदेश वो अपनी हँसी या खिलखिलाहट के ज़रिए सामने वाले जानवरों को भेजते हैं. आमतौर पर यह तब होता है जब किसी शिकार या भोजन के मुद्दे पर जब उनके बीच लड़ाई होती है.

इससे पहले जो अध्ययन आए थे उनमें कहा गया था कि लकड़बग्घों की हँसी या खिलखिलाहट उनकी अधीनता के बारे में संदेश देती है लेकिन नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने में कामयाबी हासिल की है कि कोई लकड़बग्घा किसी तरह की ख़ास खिलखिलाहट किन हालात में अपनाता है.

लकड़बग्घों की खिलखिलाहट से ख़ासतौर से किसी नए लकड़बग्घे को मदद मिलती है जो किसी समूह में शामिल होना चाहता है तो उसे उस समूह में पहले से मौजूद सदस्यों की उम्र और हैसियत के बारे में अंदाज़ा लगाना हासिल हो जाता है. कोई भी नया सदस्य उस समूह में बिल्कुल निचला दर्जा पाता है और वहाँ से फिर उसकी वरिष्ठता बनती जाती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि समूह में लकड़बग्घों की हैसियत के बारे में पता रहने से अलग-अलग सदस्यों को समायोजन करने में मदद मिलती है और फिर वो अपना दर्जा और हैसियत सुधारने की भी कोशिश कर सकते हैं.

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