आईपीसीसी के काम की समीक्षा आज से

ग्लेशियर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त बारह विशेषज्ञ शुक्रवार से एम्सटर्डम में आईपीसीसी यानी जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल के कामकाज की समीक्षा शुरु करेंगे.

इस समीक्षा का आदेश आईपीसीसी की रिपोर्टों में कई ग़लतियाँ होने के आरोप लगने के बाद दिया गया था.

शुक्रवार को इस समीक्षा की शुरुआत आईपीसीसी के अध्यक्ष राजेंद्र पचौरी से पूछताछ के साथ होगी.

बारह सदस्यों की समिति

आईपीसीसी की विश्व में जलवायु परिवर्तन पर वर्ष 2007 में जारी रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद इस समीक्षा की मांग कई सरकारों ने की थी.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल की फ़रवरी में हुई बैठक में अनेक सरकारों के मंत्रियों ने आईपीसीसी के कामकाम की समीक्षा की मांग की थी.

इन मंत्रियों का मानना था कि आरोपों के कारण आईपीसीसी की छवि धूमिल हो रही है और उसके अनुमान और नतीजे संदेह के घेरे में आ रहे हैं.

इंटर अकेडमी काउंसिल ने 12 सदस्यों की समीक्षा समिति बनाई थी जिसमें विकसित और विकासशील देशों के अनेक वैज्ञानिक और अर्थशास्त्री हैं.

आपीसीसी का बचाव करने वाले कहते हैं कि वर्ष 2007 की उसकी रिपोर्ट में केवल एक ग़लती थी और वो थी - हिमालय में ग्लेशियर्स के 2035 तक पिघल जाने का अनुमान. इस बारे में आईपीसीसी ने अपनी नियमों और प्रक्रिया का अच्छी प्रकार इस्तेमाल न किए जाने की बात स्वीकार की है.

इंटर अकेडमी काउंसिल के सह-अध्यक्ष रॉबर्ट दिज्ग्राफ़ ने बीबीसी को बताया, "मैंने आईपीसीसी के बारे में कई टिप्पणियाँ पढ़ी हैं और मैंने संस्था के भीतर और बाहर कई लोगों से बात की है. उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा इतना अहम है कि इस पर पुख़्ता वैज्ञानिक सलाह की ज़रूरत है."

उनका कहना था, "आईपीसीसी का महत्व बढ़ा है. ये अच्छा वक़्त है कि हम उसके प्रबंधन के ढांचे और प्रक्रियाओं पर नज़र डालें."

संबंधित समाचार