शहरी प्रदूषण से बढ़ता है रक्तचाप

शहरों के प्रदूषण को लंबे समय तक झेलने वालों के रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है.

अब तक शहरों के प्रदूषण को श्वास की बीमारियां से जोड़ा जाता था लेकिन अब उसे उच्च रक्तचाप का भी एक कारक बताया गया है.

जर्मनी के शोधकर्ताओं ने पाँच हज़ार लोगों पर अध्ययन किया और पाया कि लंबे समय तक प्रदूषण झेलने वाले लोगों का रक्तचाप ऊंचा हुआ.

शोधकर्ताओं के इस दल का कहना है कि प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जानी चाहिए.

उच्च रक्तचाप से रक्तवाहिकाएं सख्त हो जाती हैं जिससे दिल के दौरे या पक्षाघात का ख़तरा बढ़ जाता है.

डुइसबर्ग ऐसेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने आबादी पर चल रहे एक अध्ययन का डेटा इस्तेमाल किया और देखा कि 2000 से लेकर 2003 के बीच वायु प्रदूषण का रक्तचाप पर क्या असर पड़ा.

इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से रक्तचाप भी बढ़ सकता है लेकिन अभी तक ये नहीं पता था कि लंबे समय तक प्रदूषण का सामना करने का क्या असर होता है.

हमारे शोध के परिणाम बताते हैं कि जिन इलाक़ों में वायु प्रदूषण अधिक है वहां रहने वालों में उच्च रक्तचाप अधिक पाया गया.

डॉ बारबरा हॉफ़मैन, डुइसबर्ग ऐसेन विश्वविद्यालय के शोध दल की प्रमुख

डुइसबर्ग ऐसेन विश्वविद्यालय में पर्यावरण और नैदानिक महामारी विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ बारबरा हॉफ़मैन ने कहा, "हमारे शोध के परिणाम बताते हैं कि जिन इलाक़ों में वायु प्रदूषण अधिक है वहां रहने वालों में उच्च रक्तचाप अधिक पाया गया".

उन्होने कहा, "ये ज़रूरी है कि जहां तक हो सके लंबे समय तक लोगों को अधिक वायु प्रदूषण से बचाएं".

अब यह दल इस बात की खोज करेगा कि क्या लंबे समय तक अधिक प्रदूषण में रहने से रक्तवाहिकाएं जल्दी सख़्त हो जाती हैं या नहीं.

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन में काम करने वाली एक वरिष्ठ नर्स जूडी ओ सलिवेन ने कहती हैं, "हम जानते हैं कि वायु प्रदूषण और दिल और रक्तवाहिकाओं की बीमारियों के बीच संबंध है लेकिन हम अभी यह पूरी तरह नहीं जानते कि यह संबंध क्या है".

उन्होने कहा, "यह अध्ययन एक रोचक सिद्धांत का प्रतिपादन करता है कि वायु प्रदूषण से रक्तचाप बढ़ सकता है. इस दिशा में काफ़ी शोध हो रहे हैं. इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि लोगों को प्रदूषण के ख़तरों से बचाने के लिए क्या किया जाए".

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