एचआईवी का संबंध चेचक के ख़ात्मे से?

कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक विश्व में चेचक के ख़त्म होने से शायद एचआईवी संक्रमण और बढ़ा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जो दवाई चेचक के ख़ात्मे के लिए इस्तेमाल की जाती थी वो एड्स वायरस के ख़िलाफ़ भी कुछ हद तक कारगर होती थी.

अब जब चेचक की दवा नहीं दी जा रही तो एचआईवी फैल रहा है.

अमरीकी जाँचकर्ताओं के अनुसार प्रयोगों से संकेत मिले हैं कि चेचक की दवा का प्रभाव इस बात पर पड़ता है कि एचआईवी का संक्रमण कितनी तेज़ी से हो रहा है.

हालांकि बीएमसी इम्यूनोलॉजी में शोधकर्ताओं ने ये भी लिखा है कि ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि एचआईवी से लड़ने के लिए चेचक की दवा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

वर्जिनिया की जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के डॉक्टर रेमंड और उनके सहयोगी मानते हैं कि चेचक का ख़ात्मा होने के बाद से हाल के कुछ वर्षों में एचआईवी के तेज़ी से फैलने के कारणों का पता लगाया जा सकता है.

एचआईवी संक्रमण

50 से लेकर 70 के दशक तक आते-आते चेचक की दवा देनी बंद की जाने लगी थी क्योंकि ये बीमारी लगभग ख़त्म हो गई थी. लेकिन उसके बाद से एचआईवी संक्रमण तेज़ी से बढ़ा है.

वैज्ञानिक ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि चेचक की दवा बंद होने और एचआईवी के तेज़ी से फैलने का आपस में संबंध है या नहीं.

इसके लिए उन लोगों के व्हाइट बल्ड सेल देखे गए जिन्हें हाल ही में चेचक की दवा दी गई है और फिर इस पर नज़र रखी गई कि एचआईवी का उन पर क्या असर होता है.

ऐसे लोगों में पाया गया कि एचआईवी उतनी तेज़ी से नहीं फैल रहा. यानी चेचक की दवा से एचआईवी फैलने की दर पाँच गुना कम हो गई.

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये कहना मुश्किल है कि क्या चेचक की दवा बंद होने से विश्व में एचआईवी संक्रमण तेज़ी आई या नहीं पर इस पर शोध करना ज़रूरी है.

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