कॉक्रोच कैसे करते हैं आपस में संवाद

तिलचट्टा
Image caption शोध से पता चलता है कि तिलचट्टे हमारे किचेन में बड़ा समूह बनाकर ही भोजन क्यों करते हैं

हममें से ज़्यादातर लोग अपने घरों में बड़ी संख्या में कॉक्रोच होने से अक्सर परेशान दिखते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि ये तिलचट्टे समूह में ही भोजन पर हमला क्यों करते हैं?

हाल में किए गए एक शोध से इन सबके बारे में काफ़ी रोचक चीज़ों के बारे में जानकारी मिली है.

शोध से पता चला है कि तिलचट्टे एक दूसरे को खाने की अच्छी चीज़ों के बारे में जानकारी देने के लिए एक केमिकल का इस्तेमाल करते हैं. खाने की सबसे अच्छी चीज़ों के बारे में ये समूह में फ़ैसला लेते हैं.

अध्ययन का संचालन यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के क्वीन मैरी स्कूल के वैज्ञानिकों ने किया है. इस शोध से यह जानने में मदद मिलती है कि ये कीड़े देर रात को हमारे किचेन में बड़ा समूह बनाकर ही भोजन क्यों करते हैं.

अध्ययन का प्रकाशन जर्नल बिहैविरल इकोलॉजी ऐंड सोशियोबायोलॉजी में किया गया है. शोधकर्ताओं के दल का नेतृत्व डॉ मैथ्यू लिहोरेयू ने किया है.

उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि लोग तिलचट्टों का अध्ययन करने के बजाय मारना पसंद करते हैं.

Image caption खाने की सबसे अच्छी चीजों के बारे में तिलचट्टे समूह में फैसला लेते हैं

हमेशा समूह में

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, “मैं इस बात को समझ सकता हूं लेकिन इसका मतलब है कि हम उनके व्यवहार के बारे में काफी कुछ नहीं जानते हैं.”

डॉ लिहोरेयू ने कहा, “आम तौर पर माना जाता है कि कीड़े खाने की तलाश में अकेले निकलते हैं लेकिन यह बात पूरी तरह से गलत है. आप इनको हमेशा समूह में ही देखेंगे.”

तिलचट्टे असल में एक दूसरे से संवाद कर रहे होते हैं, इस संदेह का परीक्षण करने के लिए तिलचट्टों के समूह को एक फ़ूड च्वॉयस टेस्ट दिया गया.

उन्होंने बताया, “हमने तिलचट्टों को एक छोटी सी जगह में छोड़ दिया जहां एक ही तरह की खाने की चीज़ें दो जगहों पर रखीं गईं थीं. अगर वे संवाद नहीं करते, तो हम उम्मीद करते कि दोनों चीज़ों को वे आपस में समान रूप से बांटते.”

लेकिन अधिकतर तिलचट्टे खाने के पूरे टुकड़े को तब तक खाते रहे जब तक कि वह पूरी तरह से खत्म नहीं हो गया.

केमिकल्स के ज़रिए संवाद

निरीक्षण से यह भी पता चला कि जिस टुकड़े पर जितनी अधिक संख्या में तिलचट्टे थे, उतनी ही अधिक देर तक हर तिलचट्टा खाने के टुकड़े पर मौजूद रहता.

डॉ लिहोरेयू ने कहा, “हमें नहीं पता कि वे कैसे संवाद करते हैं लेकिन इसके लिए वे केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.”

निरीक्षण के साथ-साथ किए गए गणितीय आंकड़ों से पता चला कि तिलचट्टे जब खाने की चीज़ पर मौजूद होते हैं, तो वे नज़दीकी संपर्क के ज़रिए संवाद करते हैं.

वैज्ञानिकों के शोध का अगला चरण उस केमिकल का पता लगाना होगा जिसकी मदद से ये आपस में संवाद करते हैं.

इस केमिकल की खोज के साथ ही कीटनाशक दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा.

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