ख़राब मक्के का संबंध एचआईवी से

मक्का
Image caption मक्के में होता है ख़ास तरह का फफूंद

एक नए शोध के अनुसार ख़राब मक्के और अफ़्रीक़ा में एचआईवी फैलने के बीच सीधा संबंध हो सकता है.

अमरीका में वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पाया कि जैसे- जैसे अफ़्रीक़ी देशों में मक्के की खपत में इज़ा़फ़ा हुआ है वहां एचआईवी के शिकार लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक़ मक्के में 'फ़्यूमोनीसिन' नाम का एक ख़ास क़िस्म का फफूंद विकसित होता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस फफूंद की वजह से लोगों में एचआईवी संक्रमण की संभावना ज़्यादा बढ़ जाती है.

'फ़्यूमोनीसिन' एक ऐसा ज़हरीला पदार्थ है जिसको कुछ रिपोर्टों में एसोफ़ेगस के कैंसर की बढ़ती दरों के लिए भी ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

एसोफ़ेगस गले को पेट से जोड़ने वाली नलिका है.

ये नया शोध अमरीकन जरनल ऑफ़ क्लीनीकल न्यूट्रीशन नामक पत्रिका में छपा है.

ये पहला ऐसा शोध है जिसके तहत ख़राब हो चुके मक्के और अफ़्रीक़ी देशों में एचआईवी फैलने के बीच किसी संबंध की बात सामने आई है.

शोधकर्ताओं ने कहा है कि मक्के की गुणवत्ता में सुधार करके अफ़्रीक़ा में हर साल दस लाख से ज़यादा लोगों को एचआईवी से बचाया जा सकता है यानी एचआईवी के शिकार लोगों में 50 प्रतिशत की कमी की जा सकती है.

हालांकि एचआईवी से निबटने के लिए और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

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