ब्रॉडबैंड बना क़ानूनी अधिकार

फ़िनलैंड ने हर नागरिक को ब्रॉडबैंड की सुविधा देने को क़ानूनी हक़ का दर्जा दिया है. ऐसा करने वाला फ़िनलैंड पहला देश है.

एक जुलाई से फ़िनलैंड के नागरिकों को एक मेगाबिट प्रति सैकेंड (एमबीपीएस) ब्रॉडबैंड कनेक्शन तक पहुँच मिलनी अनिवार्य होगी.

फ़िनलैंड का लक्ष्य है कि 2015 तक हर व्यक्ति के पास 100 एमबीपीएस कनेक्शन हो.

ब्रिटेन में सरकार की कोशिश है कि 2012 तक हर घर में कम से कम 2 एमबीपीएस का कनेक्शन हो लेकिन ब्रिटेन ने इसे क़ानूनी अधिकार नहीं बनाया है.

फ़िनलैंड में नए प्रावधान का मतलब है कि एक जुलाई से सारी दूरसंचार कंपनियों को नागरिकों को ब्रॉडबैंड लाइन देनी होगी जो कम से कम एक एमबीपीएस की स्पीड पर काम कर सकें.

इंटरनेट का अहम रोल

बीबीसी से बात करते हुए फ़िनलैंड की संचार मंत्री सुवी लिंडेन ने बताया,“हमने ये नया प्रावधान इसलिए तैयार किया है क्योंकि हमें लगता है कि यहाँ के नागरिकों की ज़िंदगी में इंटरनेट का अहम रोल है. इंटरनेट का काम अब केवल मनोरंजन करना भर नहीं है. हमें लगता है कि सब लोगों के पास ये सुविधा नहीं है.”

माना जाता है कि फ़िनलैंड में 96 फ़ीसदी लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं. जबकि ब्रिटेन में 73 फ़ीसदी लोग इंटरनेट से जुड़े हैं.

ब्रॉडबैंड को क़ानूनी अधिकार बनाने से उन देशों पर असर पड़ सकता है जो ग़ैर-क़ानूनी रूप से फ़ाइल-शेयरिंग के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाने के बारे में सोच रहे हैं.

ब्रिटेन और फ़्रांस दोनों ने कहा है कि वे ऐसे लोगों का इंटरनेट कनेक्शन ख़त्म कर सकते हैं या सीमित कर सकते हैं जो बार-बार फ़िल्में या संगीत मुफ़्त में डाउनलोड करते हैं.

लेकिन फ़िनलैंड की सरकार ने नरम नीति अपनाई है. फ़िनलैंड की संचार मंत्री सुवी लिंडेन बताती हैं, “ऑपरेटर ऐसे लोगों को चिट्ठी भेजेंगे जो ग़ैर कानूनी तरीके से फ़ाइलें डाउनलोड करते हैं. लेकिन हम उन लोगों के इंटरनेट कनेक्शन को काटने पर विचार नहीं कर रहे.”

इस साल बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने सर्वेक्षण करवाया था जिसमें पाया गया था कि दुनिया में पाँच में से चार लोग मानते हैं कि इंटरनेट तक पहुँच उनका मौलिक अधिकार है.