बच्चे देर से स्कूल जाएँ तो अच्छा

स्कूली छात्र
Image caption किशोरवय में शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं

यह एक अहम सवाल है कि बच्चे को एक आदर्श छात्र बनाने के लिए क्या करना चाहिए?

और शोधकर्ता इसका एक आसान सा जवाब ढूँढ़ कर लाए हैं कि उन्हें आधे घंटे और सोने देना चाहिए और इसके लिए उनके स्कूल खुलने का समय आधे घंटे आगे बढ़ा देना चाहिए.

अमरीका में हुए एक शोध में कहा गया है कि अगर स्कूल आधे घंटे देर से खुलें तो किशोरवय के या टीनएजर बच्चों की थकावट और अवसाद ठीक हो जाते हैं और वे उनमें स्कूल जाने के प्रति उत्साह बढ़ता है.

सुधार

इस अमरीकी शोध में कहा गया है कि सेना की तरह का अनुशासन भूल जाइए क्योंकि बच्चों को बिस्तर पर आधे घंटे अधिक बिताने देने से वे ज़्यादा ख़ुश होते हैं.

इस शोध में हाईस्कूल के 200 बच्चों ने भाग लिया जिनके स्कूल का समय आठ बजे की बजाय साढ़े आठ बजे कर दिया गया था.

इस शोध में पाया गया कि देर स्कूल जाने वाले बच्चों में महत्वपूर्ण बदलाव आए.

उदाहरण के तौर पर उदासी और अवसाद की शिकायत करने वाले बच्चों में से 30 प्रतिशत ने कहा कि उनकी यह शिकायत दूर हो गई है. जबकि 25 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि उनमें चिड़चिड़ाहट कम हो गई है और लगभग इतने ही बच्चों ने कहा कि उनमें थकावट से जुड़े लक्षण कम हो गए हैं.

इससे पहले हुए शोध से साबित हो चुका है कि बच्चे जब किशोरावस्था में या टीन एज में पहुँचते हैं तो उनके सोकर उठने का समय कम से कम दो घंटे आगे बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि आदर्श स्थिति में किशोरों को नौ से साढ़े नौ घंटों की नींद चाहिए होती है.

इसीलिए वैज्ञानिक सुझाव दे रहे हैं कि यदि स्कूल आधे घंटे की देरी से शुरु हों तो कक्षा में ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है.

इस शोध के बाद छात्रों और स्कूल के कर्मचारियों ने आधे घंटे देर से स्कूल शुरु करने की ज़ोरदार वकालत की है.

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