लाल सागर में मूंगे के अस्तित्व को खतरा

मूंगे की चट्टान
Image caption समुद्र तल के बढ़ते तापमान से लाल सागर में मूंगे के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इसी तरह से ग्लोबल वार्मिंग का दौर जारी रहा तो लाल सागर में मूंगे की एक प्रजाति का विकास रुक सकता है.

अमरीका के वैज्ञानिकों ने 3-डी तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसा शोध किया है.

इस शोध के आधार पर बताया गया है कि साल 1998 से लेकर अब तक मूंगे की डिप्लोएस्टेरिया हैलियोपैरा प्रजाति की वृद्धि दर में 30 फ़ीसदी की कमी आ गई है.

समुद्र तल का बढ़ता तापमान इस विकास में बड़ी बाधा बनकर सामने आया है. शोध के नतीजों को जर्नल साइंस में प्रकाशित किया गया है.

वैज्ञानिकों ने मूंगे की चट्टानों की वृद्धि दर में कमी का मापन करने में सफलता हासिल की.

वुड्स होल ओसेनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन में रिसर्च स्पेशियलिस्ट और इस शोध की सह-लेखिका एनी कोहने ने बीबीसी को बताया, "मूंगे की चट्टान कैल्शियम कार्बोनेट का मृत कंकाल होता है. साल 1998 के बाद से इस आकृति के ऊपरी सिरे की वृद्धि दर में 30 फ़ीसदी की कमी हुई है, जबकि कैल्शियम कार्बोनेट के उत्पादन में 20 फ़ीसदी की कम हुई."

लाल सागर का पारिस्थितिकी तंत्र अपनी विविधता और समृद्धता की वजह से दुनिया भर में मशहूर रहा है. यहां मूंगे की खूबसूरत चट्टानें हजारों साल पुरानी हैं.

अस्तित्व को ख़तरा

जलवायु में बदलाव आ रहे कारकों को आधार पर वैज्ञानिकों ने गणना करके बताया कि साल 2070 तक मूंगे से कैल्शियम कार्बोनेट की चट्टानें बननी बंद हो जाएंगी. गणना में यह आधार बनाया गया कि इस अवधि तक समुद्र तल के तापमान में 1.85 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी.

कोहेन ने कहा, "मूंगे की ऐसी भी प्रजातियां हैं जो इस तापमान पर ज्यादा प्रभावित होंगी. वैसे, ऐसी भी प्रजातियां हो सकती हैं जो इस तापमान पर अपना वजूद बनाए रख सकेंगी."

उन्होंने कहा कि इस संबंध में ज्यादा नतीजों के लिए मूंगे की अन्य प्रजातियों से जुड़ी और अधिक सूचनाओं की जरूरत है.

संबंधित समाचार