भारत में एस्बेस्टस के प्रयोग पर विवाद

एस्बेस्टस की खान
Image caption भारत में एस्बेस्टस की चद्दर बनाने का उद्योग 10 फ़ीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के वसंत विहार की झुग्गियों में रहने वाली गीता रेवारमल और उनके पति ने बारिश से बचने के लिए अपनी झुग्गी की छत पर एस्बेस्टस से बनी सीमेंट की चद्दरें लगाई हैं.

भारत में एस्बेस्टस का सबसे अधिक इस्तेमाल सीमेंट की चद्दरें बनाने में किया जाता है. कम कीमत वाली ये चद्दरें घरों की छत बनाने में इस्तेमाल की जाती हैं.

गीता रेवारमल कहती हैं,"बरसात में घर को सूखा रखना बड़ी चुनौती है. हम अपनी छत को पक्का नहीं करवा सकते हैं, वहीं छप्पर लगाने से आग लगने का ख़तरा है और लोहे की चद्दर मे जंग लग जाती है तो तिरपाल हवा में उड़ जाता है.ऐसे में एस्बेस्टस एक अच्छा विकल्प है."

सस्ता एस्बेस्टस

भारत में एस्बेस्टस से बनी सीमेंट की चद्दर बनाने का उद्योग 10 फ़ीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है.

भारत सरकार की ग्रामीण आवास परियोजनाओं की वजह से इनकी मांग बढ़ गई है. क्योंकि इन योजनाओं में घर की क़ीमत को कम रखने पर ज़ोर दिया जाता है.

विश्व स्वास्थय सगंठन (डब्ल्यूएचओ)के अनुमान के मुताबिक़ एस्बेस्टस के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों की वजह से हर साल नब्बे हज़ार लोगों की मौत हो जाती है.

इस भयावह तस्वीर के बाद भी भारत में एस्बेस्टस का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है.

भारत में एस्बेस्टस का विरोध कर रही 'बैन एस्बेस्टस नेटवर्क ऑफ इंडिया' के गोपाल कृष्ण कहते हैं, "हमारी माँग है कि एस्बेस्टस पर तुरंत रोक लगाई जाए, जिन इमारतों में एस्बेस्टस का इस्तेमाल किया गया है उन्हें इससे मुक्त करवाया जाए. एस्बेस्टस का असर सभी वर्गों पर हो रहा है. इससे होने वाली बीमारियों का इलाज करना मुशकिल होगा."

डब्ल्यूएचओ ने सभी प्रकार के एस्बेस्टस को कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों की श्रेणी मे रखा है. इसे देखते हुए कई विकसित देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है.

एस्बेस्टस से होने वाले कैंसर और अन्य बीमारियों का पता लगाने में काफी समय लगता है और इनके इलाज में भी काफी परेशानी होती है.

महामारी की आशंका

दिल्ली के मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलज में पर्यावरण से संबंधित और पेशागत बीमारियों का इलाज करने वाले केंद्र के निदेशक डॉक्टर तुषारकांत जोशी का कहना है,"अगले एक-दो दशक में देश को कैंसर की महामारी का सामना करना पड़ सकता है.क्योंकि पश्चिम में एस्बेस्टस के संपर्क में आने से पहले सावधानी बरती जाती थी लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता है.''

भारत में सफ़ेद एस्बेस्टस के खनन पर रोक है लेकिन इसके आयात, निर्यात और निर्माण उद्योग में इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है.

भारत कच्चे एस्बेस्टस का सबसे ज़्यादा आयात करने वाले देशों में से एक है. यह आयात कनाडा, ब्राज़ील, रुस और ज़िम्बाब्वे जैसे देशों से किया जाता है.

एस्बेस्टस सीमेंट प्रोडक्टस मैन्युफेचर्रस एसोसिएशन के मुताबिक़ भारत में यह उद्योग सौ करोड़ डॉलर का है और करीब तीन लाख लोग इससे जुड़े हुए हैं.

एसोसिएशन ने लिखित में भेजे बीबीसी के सवालों के जवाब में कहा है कि भारत में एस्बेस्टस सीमेंट के रुप में बनाया जाता है और निर्माण के समय पूरी सावधानी बरती जाती है.

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