हाथी का आशीर्वाद उसके लिए अभिशाप

हाथी

हाथियों को रोज़ 500 से ज़्यादा तीर्थ यात्रियों को सूंड़ से ज़बरदस्ती छूना पड़ता है.

तमिलनाडु के वन अधिकारियों ने मंदिर में हाथियों से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिलवाने का चलन रोकने का अनुरोध किया है.

बीबीसी संवाददाता जिल मैक्गिवरिंग के अनुसार तमिलनाडु के वन अधिकारियों को चिंता है कि हाथियों की सूंड के ज़रिए आशीर्वाद देने की इस परंपरा से हाथी बीमार पड़ सकते हैं.

तमिलनाडु के मंदिरों में लगभग 50 हाथी है और उन्हें सूंड़ से तीर्थ यात्रियों के सिर को छूने के लिए मजबूर किया जाता है.

वन अधिकारियों का कहना है कि तीर्थ यात्रियों को छूने से हाथियों को टीबी होने का ख़तरा है. पिछले कुछ वर्षों में मंदिर में रखे चार हाथियों की टीबी से मौत हो चुकी है.

तीर्थ यात्रियों को छूने से हाथियों को टीबी होने का ख़तरा है.

तमिल नाडु के वन अधिकारी

अधिकारियों के अनुसार हाथियों को हर दिन लगभग 500 तीर्थ यात्रियों के साथ ये प्रथा निभानी पड़ती है. इस तरह मंदिरों में रखे इन हाथियों को टीबी और ऐसी कई बीमारियाँ होने का ख़तरा हो सकता है जो छूने से फैलती हैं.

मंदिरों की व्यवस्था की देखरेख करने वाले सरकारी विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि वह वन विभाग के इस अनुरोध का पालन करेंगे.

लेकिन एक दक्षिणपंथी हिंदू संगठन ने इस आवेदन पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह का कोई भी फ़ैसला करने से पहले इस पर चर्चा होनी चाहिए.

उल्लेखनीय है कि जानवरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कुछ संगठन लंबे समय से मंदिरों के हाथियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं.

इन संगठनों का कहना है कि हाथी बेहद समझदार जानवर और सामाजिक प्राणी है और उसे ज़बरदस्ती अलग-थलग नहीं करना चाहिए.

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