जीन संशोधित फ़सलें जंगलों में भी..

राई के पौधे
Image caption अमरीका के जंगलों में पहली बार बड़े पैमाने पर जीन संशोधित राई के पौधे पाए गए हैं

अमरीका में वैज्ञानिकों को इस बात के नए प्रमाण मिले हैं कि जीन संशोधित फ़सलें जंगलों में भी उगाई जा सकती हैं और ये फ़सलें वहां संभवत: दशकों तक फल-फूल भी सकती हैं.

अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ अरकांसस के वैज्ञानिकों ने नॉर्थ डैकोटा में राई के पौधों पर सर्वेक्षण किया है. इसमें पाया गया है कि यहां के जंगलों में पाए जाने वाले राई के 80 फ़ीसदी पौधों में ट्रांसजीन उपस्थित थे.

वैज्ञानिकों ने बताया है कि इन पौधों के जीन संशोधित गुणों की वजह से कीड़े-मकोड़ों से अप्रभावित रहे और जंगलों में उन्हें फलने-फूलने में मदद मिली. अमरीका के नॉर्थ डैकोटा इलाके़ में बड़े पैमाने पर राई के पौधे मिलते हैं.

शोध के नतीजों को पिट्सबर्ग में इकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ अमरीका की सालाना बैठक में पेश किया गया है.

80 फ़ीसदी में ट्रांस जीन

शोध टीम की अगुवाई करने वाली वैज्ञानिक सिंडी सैगर्स ने बताया, "हमने नॉर्थ डैकोटा में 5000 किलोमीटर की यात्रा की. यहां हम 604 जगहों पर रूके जिनमें से 46 फ़ीसदी जगहों पर हमें राई के पौधे मिले. इन पौधों में से 80 फ़ीसदी में कम से कम एक ट्रांस जीन मौजूद था."

ट्रांस जीन वाले राई के पौधों पर उन कैमिकल्स का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जिनसे पौधों के विकास में रूकावट आती है.

नॉर्थ डैकोटा में राई के पौधों में जीन संशोधन किया गया है ताकि उन पर पौधों के विकास में बाधक कैमिकल्स का प्रभाव न पड़े. इनमें पसंदीदा क़िस्में मोंसैंटो का राउंड अप रेडी और बेयर का लिबर्टी लिंक हैं. जंगलों में पाए गए अधिकतर पौधों में ये क़िस्में पाई गईं.

ऐसा पहली बार है जब अमरीका के जंगलों में जीन संशोधित (जेनेटिकली मॉडिफ़ायड यानी जीएम) फ़सलों को फलता-फूलता पाया गया है. जंगलों में इतने बड़े पैमाने पर जीन संशोधित फ़सलों की मौजूदगी वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्य का विषय था.

अमरीका जीन संशोधित फ़सलों पर पाबंदी लगाने का पक्षधर नहीं है. जबकि यूरोपीय संघ ने इस मामले में अधिक सावधानीपूर्ण रवैया अपनाया है. हालाँकि यूरोपीय संघ के कई देश जीएम तकनीक अपनाए जाने को लेकर इच्छुक हैं.

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