गहरे रंग के चॉकलेट से दिल रहे अच्छा

चौकलेट
Image caption चॉकलेट खाना दिल के ख़तरे को कम करता है

अमरीका में हुए एक शोध के मुताबिक जो महिलाएं हफ़्ते में कम से कम एक से दो बार गहरे रंग का चॉकलेट खाती हैं, उन्हें दिल की बीमारी का ख़तरा कम हो जाता है.

शोध में पाया गया है कि हर रोज़ चॉकलेट खानेवाली महिलाओं को वो फ़ायदा नहीं हुआ है जो एक से दो बार चॉकलेट खानेवाली महिलाओं को हुआ.

ऐसी महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा बाकी महिलाओं की तुलना में तीन गुना कम होता है.

अमरीकन हार्ट एसोसिएशन की एक पत्रिका, द बॉस्टन स्टडी के मुताबिक पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वीडन की 32 हज़ार महिलाओं पर ये शोध किया गया है. इन महिलाओं की उम्र 48 से 83 वर्ष की है.

वैसे डायटीशियन का कहना है कि ज़्यादा चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए नुक़सानदेह है.

इस शोध में कहा गया है कि 19 मे 30 ग्राम तक के गहरे रंग के चॉकलेट खाने से दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा 32 प्रतिशत कम हो जाता है.

लेकिन इस शोध के मुताबिक वो महिलाएं जो हर रोज़ ही चॉकलेट खाती हैं, उन्हें दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा कम नहीं होता.

शोधकर्ताओं का मानना है कि हफ़्ते में एक से दो बार से ज़्यादा या कम चॉकलेट खाने से दिल के दौरे के ख़तरे के कम करने के गहरे रंग के चॉकलेट का असर कम पड़ जाता है.

अति भी ठीक नहीं

शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि बहुत ज़्यादा चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए नुक़सानदेह है क्योंकि इसमें चीनी और वसा की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है और इसे खाने से लोगों का वज़न बढ़ सकता है.

लेकिन इस विषय पर पहले हुए शोध बताते है कि चॉकलेट में 'फ़्लावानॉल्स' की भारी मात्रा होती है जो रक्तचाप को कम कर सकती है. इससे दिल की बीमारी से बचाव होता है.

इस विषय पर काम करनेवालों का दावा है कि ख़ास तौर पर दिल की बीमारी से जुड़ा अपनी तरह का ये पहला शोध है.

बॉस्टन के मेंडिकल सेंटर के डॉक्टर मर्रे मिटलमैन का कहना है कि "आप इस तथ्य को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते कि चॉकलेट में कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है और इसे खाने से वज़न बढ़ने का ख़तरा बना रहता है."

डॉक्टर मर्रे मिटलमैन कहते हैं,"अगर गहरे रंग का चॉकलेट अगर उचित मात्रा में लिया जाए तो ये स्फूर्ति का एक अच्छा विकल्प है."

कोको की मात्रा

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस चॉकलेट में ज़्यादा कोको होता है वो हृदय के लिए बेहतर होता है.

गहरे रंग के चॉकलेट में कोको 75 प्रतिशत तक होता है जबकि सामान्य मिल्क चॉकलेट में यह 25 प्रतिशत या उससे कम हो सकता है.

ब्रिटिश हॉर्ट फ़ाउन्डेशन की वरिष्ठ डायटीशियन विक्टोरिया टेलर का कहना है कि इस शोध से ये साबित होता है कि हमारे खाने में सही तत्वों का उचित मात्रा में होना कितना महत्त्वपूर्ण है.

विक्टोरिया टेलर का कहना है,"अब जब आप चॉकलेट खाएं तो ये भी ध्यान रखिए कि चॉकलेट में जो एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, वो फल और सब्ज़यों में भी होते हैं और चॉकलेट की तरह उनमें वसा और कैलोरी की अधिक मात्रा नहीं होती."

संबंधित समाचार