एक दिन के बच्चे को लगा पेस मेकर

ऑपरेशन के बाद माँ के साथ बच्चा
Image caption डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता

उम्रदराज़ लोगों को पेस मेकर लगाने की बात तो अनगिनत बार सुनी-देखी होंगीं लेकिन एक दिन के बच्चे को पेस मेकर लगाने की बात शायद आप पहली बार सुन रहे होंगे.

छत्तीसगढ़ के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों का दावा है कि दुनिया में पहली बार एक दिन के बच्चे को पेस मेकर लगाया गया है. उनका कहना है कि इससे पहले अमरीका में 48 घंटे यानी दो दिन उम्र के एक बच्चे को पेस मेकर लगाया गया था.

पेस मेकर वह मशीन है जो हृदय की असामान्य गति को नियंत्रित करती है और उसे सही गति से धड़कते रहने में सहयोग करती है.

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब बिल्कुल ठीक है.

कम थी धड़कन

अभी बच्चे का जन्म भी नहीं हुआ था कि डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के दिल की धड़कने बहुत कम है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एमई सामल और हृदय शल्यचिकित्सक डॉक्टर नागेंद्र भोसले के अनुसार जब इस बच्चे की माँ अस्पताल में भर्ती हुईं तो बच्चे की धड़कन प्रति मिनट 35 से 40 के आसपास थी. ऐसे में यह समझ पाना बहुत मुश्किल था कि आख़िर बच्चे की ह्रदय गति इतनी कम क्यों है?

अपोलो के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील कुमार बताते हैं, “हमने इतनी कम धड़कन के कारण तत्काल सीज़ेरियन ऑपरेशन करने का निर्णय लिया."

वे बताते हैं, "मैंने कुछ समय पहले ही बच्चों की असामान्य बीमारियों पर हुए एक अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में भाग लिया था, जिसके कारण मुझे लगा कि कहीं बच्चे को ‘एसेली’ के कारण तो परेशानी नहीं है? जांच में हमने पाया कि बच्चे की माँ को ‘एसेली’ नामक बीमारी है, जिसके कारण बच्चे की ह्रदय नली अवरुद्ध हो गई थी."

'एसेली' ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरोधकक्षमता ही शरीर के लिए घातक बन जाती है और इससे शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित होते हैं.

वे बताते हैं कि इसके बाद आनन-फानन में बच्चे को पेस मेकर लगाने का निर्णय लिया गया.

फिर पता चला कि अस्पताल में छोटे बच्चों के इस्तेमाल में आने वाली पेस मेकर मशीन उपलब्ध नहीं है क्योंकि छोटे बच्चों को पेस मेकर लगाने की ज़रुरत आमतौर पर नहीं पड़ती.

वायु सेवा से सीधे नहीं जुड़े हो पाने के कारण बिलासपुर में इसकी तत्काल उपलब्धता भी मुश्किल थी. फिर किसी तरह एक पेस मेकर बनाने वाली कंपनी से संपर्क किया गया और अगली दोपहर ऑपरेशन की तैयारी होने तक मुंबई से रायपुर के रास्ते पेस मेकर लेकर कंपनी के लोग अस्पताल में उपस्थित थे.

अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एमई सामल और हृदय शल्य चिकित्सक डॉक्टर नागेंद्र भोसले की टीम ने ऑपरेशन करके बच्चे को पेस मेकर लगाया तब कहीं जाकर बच्चे की ह्रदय गति सामान्य हुई.

आम बीमारी नहीं

Image caption डॉक्टरों को मुंबई से बच्चों वाला पेसमेकर मंगवाना पड़ा

ढेर सारे जरनल और रिसर्च पेपरों के बीच बैठे डॉक्टर सुशील कुमार बताते हैं कि इस तरह की बीमारी के मामले आम नहीं हैं. वे बताते हैं कि प्रति 20 हज़ार बच्चों में से एक बच्चा इस तरह की परेशानी से गुज़रता है.

उनका कहना है, "इस तरह के मामलों में चिकित्सक दूसरे कारण तलाशते हुये इसका इलाज करते रहते हैं और बच्चे की मौत हो जाती है."

डॉक्टर सुशील कुमार कहते हैं,“इस सामान्य बीमारी के लिये पेस मेकर के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है लेकिन अब तक दुनिया में 24 घंटे की उम्र वाले किसी बच्चे को पेस मेकर लगाने का कोई मामला कहीं दर्ज नहीं है. इस मामले से साबित हुआ कि चिकित्सक थोड़ी-सी सतर्कता बरतें तो बहुत से बच्चों की जान बच सकती है. ”

बच्चे की माँ पूर्णिमा इस बात से खुश हैं कि उनका बच्चा अब सामान्य है. बच्चे के पिता राजेश उपाध्याय फिलहाल अपने बेटे के साथ मगन हैं.

वे मुस्कुराते हुये कहते हैं,“डाक्टरों के कारण मेरे बच्चे की जान बच गई. फिलहाल तो मैं सबको धन्यवाद दे रहा हूं. इस बात की परवाह किये बिना कि अस्पताल का बिल कितना लंबा-चौड़ा होगा.”

डाक्टरों की टीम का कहना है कि इससे पहले अमरीका के मियामी में 48 घंटे के शिशु को पेसमेकर लगाया गया था.

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