आईपीसीसी अध्यक्ष बदलने की माँग

आरके पचौरी
Image caption आरके पचौरी आठ वर्षों से संस्था के प्रमुख हैं

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरगर्वनमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी)के अध्यक्ष डॉक्टर आरके पचौरी को पद से हटाने की माँग में अब ब्रिटेन के जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ और राजनेता भी शामिल हो गए हैं.

2007 में प्रकाशित आईपीपीसी की एक रिपोर्ट में ग़लती पाए जाने के बाद से उनके इस्तीफ़े की माँग होती रही है लेकिन अब ये माँग एक बार फिर तेज़ होती दिख रही है.

इस माँग में नया स्वर जुड़ गया है जलवायु परिवर्तन पर ब्रितानी संसदीय समिति के चेयरमैन टिम यो का.

बीबीसी से एक बातचीत में टिम यो ने कहा कि डॉक्टर पचौरी अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं इसलिए अब उन्हें पद से हट जाना चाहिए.

लेकिन बताया जा रहा है कि भारत सरकार का पूरा समर्थन उनके साथ है इसीलिए वे अपने पद पर बने हुए हैं.

जानकारों का कहना है कि अगर पचौरी जल्दी ही इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो यह एक तरह के कूटनीतिक विवाद में बदल सकता है.

डॉक्टर पचौरी की ओर से कोई ताज़ा बयान नहीं आया है लेकिन वे पहले कह चुके हैं कि उनके ख़िलाफ़ साज़िश के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं.

वे लंबे समय से उन लोगों के निशाने पर रहे हैं जो जलवायु परिवर्तन को मानव निर्मित स्थिति मानने से इंकार करते हैं.

पिछले आठ वर्षों से आईपीसीसी के चेयरमैन डॉक्टर पचौरी इससे पहले द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) के निदेशक थे.

पिछले महीने ही इंटर एकेडेमी काउंसिल की स्वतंत्र जाँच रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि आईपीसीसी के अध्यक्ष का कार्यकाल छह वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए.

उनकी मुसीबतें तब शुरू हुई थीं जब 2007 में आईपीसीसी की एक बहुचर्चित रिपोर्ट में कहा गया था कि हिमालय के ग्लेशियर अगले 25 वर्षों में पिघल जाएँगे. बाद में पाया गया कि यह निष्कर्ष तथ्यात्मक रूप से ग़लत था.

बाद में उन्होंने इस भूल को स्वीकार कर लिया था लेकिन पर्यावरण संबंधी जिस पैनल को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका हो, उसके मुखिया के तौर पर काम कर रहे डॉक्टर आरके पचौरी की छवि और विश्वसनीयता पर धब्बा लग ही गया है.

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