चिप का चमत्कार

रेटिना

फ़िनलैंड निवासी मीका टेरहो चिप लगने के बाद अक्षर पहचानने लगे हैं.

जर्मनी में शोधकर्ताओं के अनुसार जन्म से अंधे एक व्यक्ति ने रेटिना इम्पलांट के बाद अक्षरों को पहचानना शुरू कर दिया है. ये व्यक्ति वंशागत दृष्टिहीनता से पीड़ित था.

फ़िनलैंड निवासी मीका टेरहो के रेटिना के पीछे एक चिप लगाने के बाद ये कामयाबी पाई गई है. ये नई तकनीक कुछ और मरीज़ों में भी कामयाब रही है.

चिप मरीज़ों को अपनी आंखों से चीज़ों को भांपने में सहायता करता है. इस नए अनुसंधान और चिप लगाए जाने के तज़ुर्बे की विस्तृत जानकारी 'प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द रॉयल सोसाइटी बी' नामक पत्रिका में प्रकाशित की गई है.

जर्मनी के ट्यूबिंगेन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ऐबरहार्ट ज़्रेनर और उनके सहयोगियों ने 'रेटिना इम्पलांट एजी' नामक एक निजी कंपनी में 11 लोगों की आंखों में ये चिप लगाया है.

प्रोफ़ेसर ज़्रेनर ने बीबीसी को बताया कि इनमें से जिन लोगों की स्थिति बेहद ख़राब उन्हें तो चिप का कोई लाभ नहीं हुआ लेकिन अधिकतर लोग चमकीली वस्तुओं को देख पा रहे थे.

लेकिन जब इस चिप को रेटिना की ओर पिछली तरफ़ यानि 'सेंट्रल मेक्यूलर एरिया' में फ़िट किया गया तो परिणाम और अधिक उत्साहजनक थे. जिन तीन मरीज़ों की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया उन सभी का अंधापन वंशागत था. आंखों की इस किस्म की बीमारी का इलाज अबतक असंभव ही रहा है.

मीका टेरहो

रेटिना के पीछे चिप इम्पलांट के तीन या चार दिन बाद मैं हैरान था... मेरी आंखों में कुछ हरकत हो रही थी. शुरु में जैसे ही में आंख रोशनी से टकराती मुझे फ़्लेश दिखते. ऐसा मैंने पहले महसूस नहीं किया था.उसके बाद प्रतिदिन अभ्यास के बाद मेरी नज़र बेहतर होती गई.

मीका टेरहो

सबसे बेहतरीन नतीजे फ़िनलैंड के मीका टेरहो के रेटिना के पीछे चिप लगाने के बाद सामने आए. टेरहो चिप लगने के बाद मेज़ पर रखे एक मग, एक घड़ी और कटलरी को पहचान पाए. साथ ही वे एक कमरे स्वतंत्र रूप से घूम पाए.

उसके बाद टेरहो ने अक्षरों की भी पहचान की, जिनमें उनका नाम भी शामिल था. उनके नाम की स्पेलिंग जानबूझ कर ग़लत लिखी गई लेकिन टेरहो ये जान गए.

मीका टेरहो ने फ़िनलैंड से बीबीसी को बताया, "रेटिना के पीछे चिप इम्पलांट के तीन या चार दिन बाद मैं हैरान था... मेरी आंखों में कुछ हरकत हो रही थी. शुरु में जैसे ही में आंख रोशनी से टकराती मुझे फ़्लैश दिखते. ऐसा मैंने पहले महसूस नहीं किया था. उसके बाद प्रतिदिन अभ्यास के बाद मेरी नज़र बेहतर होती गई."

जल्द ही मीका टेरहो अक्षरों को पढ़ने लगे.

ये चिप आंखों में प्रवेश करने वाले प्रकाश को विद्युतीय आवेग में परिवर्तित कर देता है और ये आवेग आंखें के पीछे स्थित 'ऑप्टिक नर्व' को हरकत में ला देता है.

इस चिप को तैयार करने वाली टीम अब इसे और अधिक कारगर बनाने में जुट गई है.

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