बाघ बचाने पर हो रही है चर्चा

जिन तेरह देशों में बाघ रहते है उनकी सरकारें संकट में पड़े बाघों की संख्या को अगले बारह साल में दोगुना करने के उपायों पर सहमति के लिए चर्चा कर रहें है.

इंटरनेशनल टाईगर कंज़र्वेशन फोरम के तहत सेंट पीटर्सबर्ग शहर में हो रही बैठक में बाघ के प्राकृतिक आवास को बचाने, बाघ के शिकार को रोकने और बचाव अभियान को आर्थिक मदद मुहैया करवाने जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी.

खुले जंगल में रहने वाले बाघों की संख्या लगभग 3000 रह गई है जो कि पिछले एक दशक में 40 प्रतिशत घटी है.

चेतावनी दी जा रही है कि अगर इन्हें बचाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो कि अगले बीस साल में ये संख्या काफ़ी गिर सकती है.

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और मेज़बान रुस के ब्लादिमीर पुतिन भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे.

वल्ड वाईल्ड लाईफ फंड के महानिर्देशक जिम लीप ने कहा " ये प्रजाति पलक झपकने की तेज़ी से लुप्त हो रही है."

जिम लीप कहते है " ये पहली बार हो रहा है कि विश्व भर के नेता एक प्रजाति को बचाने के लिए एक साथ आए है. ये अवसर बाघ को बचाने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति जुटाने का अच्छा अवसर है."

जंगली जानवरों के अंग व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था 'ट्रैफिक' का कहना है कि पिछले एक दशक में 1000 से ज़्यादा बाघों के अंग बरामद किए गए.

इस बात को लेकर भी सहमति है कि छोटे देशों को इस अभियान में आर्थिक मदद की ज़रुरत होगी.

वैज्ञानिकों नें अनुमान लगाया था कि बाघों को बचाने के लिए सालाना 80 मिलियन डॉलर की ज़रुरत है जबकि अभी तक 50 मिलियन डॉलर ही इक्ठ्ठे हो पाए हैं.

हालांकि अभियान चलाने वालों का कहना है कि पैसों की कमी कर्महीनता का बहाना नहीं हो सकती.

एनवायरमैंट इनवेस्टीगेशन एजेंसी के अलास्दैर कैमरन कहते है " मौजूदा मसौदे में काफी सकारात्मक बाते हैं. लेकिन इनकी सफलता राजनैतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है."

लेकिन अलास्दैर कैमरन कहते हैं कि इस मसौदे में बाघ के अंगों की माँग को घटाने और बाघों को पिंजरों में रखे जाने के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है.

चीन में दोनों ही मुद्दे संवेदनशील हैं. ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि विश्व भर के जंगलों में रहने वाले बाघों से ज्यादा बाघ चीन में कैद में रहते हैं.

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