संचार उपग्रह के प्रक्षेपण पर निगाहें

भारत का संचार उपग्रह जीसैट-5पी श्रीहरीकोटा से शनिवार को प्रक्षेपित किया जाएगा. इसके लिए जीएसएलवी-एफ़06 यान का इस्तेमाल होगा.

इस उपग्रह को इसरो के बंगलौर केंद्र में विकसित किया गया है और जीसैट सिरीज़ में ये पाँचवा उपग्रह है. इसकी उम्र 12 साल है.

इसरो प्रवक्ता एस सतीश ने एजेंसियों से बातचीत में कहा है कि प्रक्षेपण के लिए कांउटडाउन शुक्रवार सुबह दस बजकर चार मिनट पर शुरु हो गया था.

ये उपग्रह पहले 20 दिसंबर को लॉन्च किया जाना था लेकिन रूसी क्रायोजेनिक इंजन में ख़राबी के कारण प्रक्षेपण टाल दिया गया था.

जीसैट-5पी उपग्रह में 24 सी-बैंड वाले ट्रांसपॉन्डर हैं और इसका मकसद भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली यानी इनसैट द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही संचार सेवाओं में और इजाफ़ा करना है. इनसैट 1999 में लॉन्च किया गया था.

बेहतर सेवा

नए संचार उपग्रह से टीवी, टेलीमेडीसन, टेलीशिक्षा और टेलीफ़ोन सेवाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी.

इससे पहले अप्रैल 2010 में भारतीय वैज्ञानिकों का जीएसएलवी डी मिशन सफल नहीं हो पाया था.प्रक्षेपण यान अपने निर्धारित रास्ते पर उड़ान पूरी नहीं कर सका था.

जीएसएलवी डी 3 यानी जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच वेहिकल पहली बार घरेलू क्रायोजेनिक टेक्नॉलॉजी के ज़रिए प्रक्षेपित किया गया था और प्रक्षेपण के दौरान कोई समस्या नहीं आई थी.

अगर ये मिशन सफल होता तो भारत अमरीका और रुस जैसे उन पाँच देशों की श्रेणी में शामिल हो जाता जिनके पास इस तरह की तकनीक है. भारतीय वैज्ञानिकों ने इस तकनीक पर 18 साल पहले काम करना शुरु किया था.

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